नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गन्ने से एथेनॉल उत्पादन और देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि तेल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकार ने गन्ने से एथेनॉल बनाना शुरू किया, जिसके कारण चीनी की कमी की स्थिति पैदा हुई।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब यदि चीनी का आयात करना पड़ा तो उसी विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल होगा, जिसे तेल आयात पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए बचाने की बात कही जा रही थी। उन्होंने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह ऐसी सरकार है, जिसे परिणामों का अंदाजा लगाए बिना फैसले किए जा रहे हैं।
मोदी सरकार या फिर अनपढ़ सरकार.. ये लोग Foreign Exchange बचाने के लिए गन्ने से Ethanol बना रहे थे। अब देश में चीनी की कमी हो गई है और सिर्फ 17 दिनों में दाम ₹20 बढ़ गए हैं। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि वही Foreign Exchange फूंक कर चीनी Import करने की नौबत आ गई है। ये सरकार है या… pic.twitter.com/XjvFTAK7bk
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 20, 2026
गन्ने से एथेनॉल उत्पादन पर उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि तेल आयात पर विदेशी मुद्रा खर्च को कम करने के उद्देश्य से गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके चलते चीनी की कमी हो गई और अब सरकार को चीनी आयात करने की नौबत आ सकती है। हालांकि, केजरीवाल के इस दावे पर केंद्र सरकार की ओर से इस बयान के संदर्भ में तत्काल कोई अलग प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तेल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गन्ने से एथनॉल बनाना शुरू किया। नतीजन चीनी की कमी हो गई। अब उस विदेशी मुद्रा से चीनी आयात करेंगे। पूरी की पूरी अनपढ़ों की सरकार है। किसी को कुछ नहीं पता कि क्या करने से क्या होगा। pic.twitter.com/mVs2G2vSZ4
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 20, 2026
E-20 पेट्रोल को लेकर लगातार केंद्र पर हमलावर
केजरीवाल पिछले कुछ समय से E-20 पेट्रोल के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने ईंधन की गुणवत्ता और विभिन्न वाहनों के साथ उसकी अनुकूलता से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि वाहन मालिकों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन के विकल्प उपलब्ध होने चाहिए, ताकि लोग पारंपरिक पेट्रोल का भी चयन कर सकें।
इससे पहले एक वीडियो संदेश में केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि E-20 नीति की आलोचना करने वाले लोगों की सोशल मीडिया सामग्री हटाई जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा था कि सरकार लोगों की चिंताओं और सवालों को दबाने की कोशिश कर रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया था जवाब
वहीं, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि वाहनों की माइलेज में बदलाव के लिए केवल E-20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। मंत्रालय के अनुसार, वास्तविक माइलेज कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें वाहन चलाने का तरीका, यातायात की स्थिति, वाहन का रखरखाव, टायर का दबाव और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल शामिल है। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि E-20 ईंधन का व्यापक परीक्षण और सत्यापन किया जा चुका है तथा वाहन की वास्तविक ईंधन दक्षता सड़क और वाहन की परिस्थितियों सहित कई कारकों से प्रभावित होती है।
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