नई दिल्ली: टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने भविष्य को लेकर बड़ा फैसला किया है। उन्होंने टाटा संस बोर्ड को सूचित किया है कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश नहीं करेंगे। उन्होंने बोर्ड से उत्तराधिकार की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का अनुरोध किया है, ताकि नेतृत्व परिवर्तन व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब टाटा संस की आगामी 18 अगस्त की AGM से पहले कंपनी के नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हैं। चंद्रशेखरन के बयान के अनुसार, उनके अगले पांच साल के कार्यकाल को लेकर प्रस्ताव पहले बोर्ड के सामने रखा गया था, लेकिन उस पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी।

40 साल से टाटा ग्रुप से जुड़े हैं चंद्रशेखरन

एन चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। वह 1987 में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने समूह की अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं और 2009 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS के CEO बने।

इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़े कारोबारी क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत की। अब करीब चार दशक लंबे करियर के बाद उन्होंने अगले कार्यकाल से खुद को अलग रखने का निर्णय लिया है।

अपने शेयरहोल्डर्स को दिए बयान में चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 साल पूरे होने का जिक्र किया और इस प्रतिष्ठित संस्थान के साथ काम करने के अवसर के लिए आभार जताया।

पांच साल के एक्सटेंशन पर नहीं बनी सहमति

चंद्रशेखरन के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के लिए प्रस्ताव और सिफारिश की थी। इसके बाद टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव पर विचार किया।

यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था। हालांकि, चंद्रशेखरन ने बताया कि बोर्ड के एक सदस्य के समर्थन नहीं करने के कारण प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी।

उन्होंने कहा कि इस वजह से उन्होंने उस समय निर्णय को टालने का फैसला किया। उनके मुताबिक, उस बोर्ड बैठक को करीब छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन इस विषय पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया।

खुद को दोबारा पेश नहीं करने का फैसला

चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा संस एक बड़ा संस्थान है और इस समय कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाएं अहम चरण में हैं। ऐसे में कंपनी के लिए भविष्य के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि फरवरी 2027 के बाद समूह का नेतृत्व कौन करेगा, इसे लेकर कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबारी साझेदारों और अन्य हितधारकों के बीच स्पष्टता रहनी चाहिए।

इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बोर्ड को बताया कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराएंगे। साथ ही उन्होंने बोर्ड से जल्द उत्तराधिकारी तय करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।

टाटा संस का महत्व कितना बड़ा है?

टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और समूह की कई बड़ी कंपनियों में इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी और नियंत्रण है। इनमें Tata Motors, TCS और Air India जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।

टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस के सबसे बड़े शेयरहोल्डर्स में है और दिए गए विवरण के मुताबिक उसकी हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी है। ऐसे में टाटा संस के चेयरमैन पद पर होने वाला बदलाव पूरे टाटा समूह के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब उत्तराधिकारी पर नजर

चंद्रशेखरन के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि टाटा संस की कमान उनके बाद किसे सौंपी जाएगी। उन्होंने खुद बोर्ड से इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की अपील की है।

फिलहाल उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक जारी रहेगा। इसलिए तत्काल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, लेकिन उनके बयान ने उत्तराधिकारी चयन की प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।

आने वाले महीनों में टाटा संस बोर्ड की ओर से नए चेयरमैन को लेकर फैसला महत्वपूर्ण होगा। खासकर इसलिए क्योंकि टाटा समूह की कई रणनीतिक परियोजनाएं और बड़े कारोबारी फैसले नेतृत्व की निरंतरता से जुड़े हुए हैं।