नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए CJP छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की जांच के लिए गठित हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) के पुनर्गठन की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि समिति ने हाल ही में अपना काम शुरू किया है और इस स्तर पर उसके खिलाफ उठाई गई आपत्तियां अनुमान पर आधारित और समय से पहले हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि HPEC पर इस तरह से सवाल उठाए गए हैं, जो समय से पहले और जल्दबाजी में की गई आपत्तियां हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति का गठन निष्पक्ष, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के जरिए अदालत की सहायता के लिए किया गया है। कोर्ट ने कहा कि HPEC का उद्देश्य मामले में किसी एक पक्ष के हितों का समर्थन करना नहीं है।

18 अगस्त को हुआ था समिति का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को पांच सदस्यीय HPEC का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी (R. Subhash Reddy) कर रहे हैं। समिति जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित अत्यधिक पुलिस बल के इस्तेमाल के साथ-साथ सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ कथित हिंसा के आरोपों की जांच कर रही है। HPEC को अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी है और पूरी जांच अदालत की निगरानी में होगी।

गोलीबारी और महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोपों की होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने समिति की जांच का दायरा और प्रक्रिया भी तय की है। शुरुआत में HPEC को पेलेट गन के कथित इस्तेमाल, लक्षित हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों के कथित उत्पीड़न और दोनों पक्षों द्वारा कथित अत्यधिक हिंसा तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच करने को कहा गया है।पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापक संवैधानिक सवालों पर उचित समय पर अदालत स्वयं विचार करेगी।

गवाहों की पहचान रखी जाएगी गोपनीय

कमजोर और संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पहचान गोपनीय रखने का निर्देश दिया है। गवाहों के बयान और साक्ष्यों को भी अत्यंत गोपनीय तरीके से संभालने को कहा गया है। कोर्ट ने यह संभावना भी जताई कि गवाहों को दस्तावेज और अन्य साक्ष्य गोपनीय रूप से जमा करने के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नोडल वकील केवल सुप्रीम कोर्ट की सहायता करेंगे और HPEC, अदालत तथा मामले के पक्षकारों के बीच संवाद के माध्यम के रूप में काम नहीं करेंगे।

दो वकीलों को बनाया गया अमिकस क्यूरी

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सी. सोलोमन (C Solomon) को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। उन्हें पक्षकारों के बीच स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका निभाने को कहा गया है। HPEC को एक सदस्य सचिव नियुक्त करने और अपनी पहली रिपोर्ट जल्द से जल्द दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है।

14 वर्षीय प्रदर्शनकारी की सुरक्षा पर भी कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने 14 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी और उसके परिवार की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर भी संज्ञान लिया। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि परिवार को कथित रूप से जान से मारने की धमकियां मिली हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर और लगातार आशंका बनी हुई है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को बच्ची और उसके परिवार की खतरे की स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही कथित तौर पर धमकी या उत्पीड़न करने वाले लोगों के खिलाफ जांच तेजी से पूरी करने को कहा गया है। इस मामले में दिल्ली पुलिस को अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित है।

कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों से जुड़ी कई याचिकाएं लंबित हैं। इनमें दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती के अलावा बिहार और देश के अन्य हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े प्रदर्शन भी शामिल हैं।