नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पार्टी बदलने वाले सांसदों और विधायकों पर 20 साल तक चुनाव लड़ने और सार्वजनिक पद संभालने पर रोक लगाने की मांग की है। पार्टी ने यह मांग वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के 10 साल के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए उठाई है। CJP के नए मांग-पत्र के पांचवें बिंदु में दल-बदल करने वाले निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 20 साल की कड़ी पाबंदी की मांग की गई है। पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि बड़े पैमाने पर दल-बदल और सरकारें गिराने के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लेन-देन की घटनाएं देश के साथ धोखा हैं।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया मंच X पर सौरव दास की पोस्ट साझा करते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलने वाले किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को सार्वजनिक पद संभालने से रोकना समय की जरूरत है। दास ने कहा कि कपिल सिब्बल ने जिस सांसद या विधायक के खिलाफ 10 साल के प्रतिबंध का प्रस्ताव दिया है, जो पार्टी X के चुनाव चिह्न पर जीतकर बाद में पैसे या दबाव के कारण पार्टी Y में शामिल हो जाता है, CJP की मांग उससे भी अधिक सख्त है। उनके मुताबिक, CJP ने ऐसे नेताओं को 20 साल तक किसी भी सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य ठहराने और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की है।
Need of the hour!Any elected representative who switches parties after being elected should be barred from holding public office. https://t.co/pJp92RhMfR
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 14, 2026
‘एंटी-डिफेक्शन कानून पुराना हो चुका है’
सौरव दास ने मौजूदा दल-बदल विरोधी कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को तोड़ने, सांसदों को कथित तौर पर 50 से 100 करोड़ रुपये देने और सरकारें गिराने जैसी गतिविधियां देश के साथ धोखा हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा एंटी-डिफेक्शन कानून पुराना हो चुका है और सत्तारूढ़ दल ने सत्ता में बने रहने की इच्छा के चलते इसके दुरुपयोग को बढ़ावा दिया है। दास ने अपने बयान के अंत में कहा, “युवा इसे बदलेंगे।”
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर सरकार पर तंज
इससे पहले रविवार को अभिजीत दिपके ने मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पर व्यंग्यात्मक तरीके से निशाना साधा। उन्होंने बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौतों को लेकर X पर एक व्यंग्यात्मक ‘इस्तीफा पत्र’ साझा किया। 13 अगस्त की तारीख वाले इस पत्र में दिपके ने खुद को मध्य प्रदेश का “मुख्यमंत्री” बताते हुए कहा कि 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनका विवेक उन्हें इस पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मध्य प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद भी दिया और व्यंग्य करते हुए कहा कि वह इस अवसर का सही तरीके से लाभ उठाने में “स्पष्ट रूप से विफल” रहे।
हाईकोर्ट ने मांगा राज्य सरकार से जवाब
बालाघाट में कथित संक्रामक बीमारियों के कारण 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने इस सप्ताह राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले में बच्चों की मौत और उसके कारणों को लेकर अदालत में सुनवाई चल रही है। CJP की ताजा मांग ने एक बार फिर दल-बदल विरोधी कानून, निर्वाचित प्रतिनिधियों के पार्टी बदलने और सरकारों के गठन एवं गिरने में राजनीतिक खरीद-फरोख्त के आरोपों पर बहस तेज कर दी है।
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