नई दिल्ली: छात्र प्रदर्शनकारी निशु आजाद ने आरोप लगाया है कि उनके घर पर कुछ लोगों ने पथराव किया। निशु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई वीडियो साझा कर दावा किया कि उनके घर की खिड़कियों और बालकनी पर पत्थर फेंके गए। उन्होंने घटना के बाद अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
निशु आजाद ने X पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, “अगर आज रात हमारे साथ कुछ होता है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?” वीडियो में निशु ने दावा किया कि पत्थर उनकी रसोई की खिड़कियों के शीशे तोड़ते हुए अंदर तक आ गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर की बालकनी पर भी पत्थर फेंके गए।
I respectfully request the police authorities to kindly provide necessary security, as I have genuine concerns for my safety. Your prompt assistance would be greatly appreciated.@ghaziabadpolice @DelhiPolice pic.twitter.com/0g9oBaDNcF
— Nishu Aazad (@Nishuazad11) September 5, 2026
पिता पर हमले के मामले में आरोपी को न्यायिक हिरासत
निशु के मुताबिक, उनकी बहन ने कुछ लोगों को कथित तौर पर पथराव करने के बाद मौके से भागते हुए सुना। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह घटनाक्रम उस मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में भेजे जाने के बाद सामने आया है, जो जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता पर कथित हमले से जुड़ा है।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को स्वतंत्र भारद्वाज को इस मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था। रविवार को पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
गिरफ्तारी की मांग को लेकर बढ़ा था दबाव
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधियों, समर्थकों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बनाया था। शुक्रवार को CJP समर्थक और राजनीतिक नेता कार्रवाई की मांग को लेकर संसद मार्ग पुलिस थाने भी पहुंचे थे। इसके बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराओं को लेकर भी स्थिति आगे बढ़ी।
FIR में SC/ST एक्ट और धमकी की धारा जोड़ी गई
पुलिस ने मौजूदा FIR में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Prevention of Atrocities Act) की धाराएं भी जोड़ी हैं। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) भी जोड़ी गई है, जो मौत की धमकी से जुड़ी आपराधिक धमकी के प्रावधान से संबंधित है।
निशु को धमकी और उत्पीड़न को लेकर अलग POCSO मामला
निशु आजाद को कथित तौर पर धमकी और उत्पीड़न से जुड़े आरोपों के बाद एक अलग POCSO मामला भी दर्ज किया गया है। निशु नाबालिग हैं। फिलहाल उनके घर पर कथित पथराव के मामले में जांच और घटनाक्रम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पथराव किसने किया और इसके पीछे क्या वजह थी।
निशु द्वारा साझा किए गए वीडियो के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस बीच, मामले से जुड़े सभी पक्षों की ओर से आगे की कार्रवाई और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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