नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो की उस अंतरिम मांग को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से तत्काल डिस्चार्ज कर परिवार की पसंद के निजी अस्पताल, मेदांता अस्पताल, में स्थानांतरित करने की मांग की थी।

कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह नहीं दिखता कि सोनम वांगचुक को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। अदालत ने यह भी कहा कि उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित करने का फैसला मनमाना नहीं कहा जा सकता।

पत्नी समेत परिजनों को मिली सोनम वांगचुक से मिलने की अनुमति

न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने सुनवाई के दौरान कहा कि वांगचुक की पत्नी, भाई और परिवार के अन्य सदस्यों को उनसे मिलने की बिना किसी प्रतिबंध के अनुमति दी गई है। परिवार को अस्पताल में रहने के लिए एक अलग कमरा भी उपलब्ध कराया गया है।

वांगचुक की बिगड़ती सेहत के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया- कोर्ट

अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने से पहले सोनम वांगचुक करीब 17-18 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। कोर्ट ने पहले की डिवीजन बेंच के उस आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें सरकारी डॉक्टरों को उनकी रोजाना चिकित्सा निगरानी करने का निर्देश दिया गया था। केंद्र सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड करते हुए अदालत ने कहा कि वांगचुक की बिगड़ती चिकित्सा स्थिति के कारण उन्हें सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था।

कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उनका शुगर और सोडियम स्तर सामान्य से कम था, जबकि पोटैशियम का स्तर बेहद खतरनाक स्तर तक गिर गया था। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि वांगचुक ने इंट्रावेनस फ्लूइड लेने की सहमति नहीं दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि सरकार ने सोनम वांगचुक की चिकित्सा स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था, इसलिए इस कार्रवाई को मनमाना नहीं माना जा सकता।

सोनम वांगचुक अस्पताल के डॉक्टर्स की निगरानी में हैं- कोर्ट 

अदालत ने यह भी कहा कि सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर लगातार उनकी सेहत की निगरानी कर रहे हैं और उनकी सहमति से केवल मौखिक दवाएं और तरल पदार्थ दिए गए हैं। ऐसे में रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ नहीं है, जिससे यह संकेत मिले कि उनके खिलाफ बल का इस्तेमाल किया गया।

सुनवाई के दौरान गीतांजलि आंगमो की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि सोनम वांगचुक को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि परिवार ने मेदांता अस्पताल से बात कर ली है और उन्हें वहां स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी है।

'सोनम वांगचुक अपराधी नहीं, उन्हें अपनी पसंद का अस्पताल चुनने का हक़ है'

कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक हिरासत में नहीं हैं, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उन्हें अपनी पसंद का अस्पताल चुनने से रोकने का कोई औचित्य नहीं है।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण वांगचुक की सेहत बिगड़ी और उनके शरीर में कीटोसिस सहित कई चिकित्सकीय जटिलताएं पैदा हुईं। इसलिए सरकारी डॉक्टरों की करीबी निगरानी जरूरी थी।

तीन दिनों के अंदर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश जारी

अदालत ने कहा कि “हर जिंदगी कीमती है” और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के इस बयान को रिकॉर्ड किया कि सोनम वांगचुक की पत्नी और भाई को उनसे 24 घंटे मिलने की अनुमति दी गई है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि परिवार को अस्पताल में एक अलग कमरा दिया गया है।

हाई कोर्ट ने फिलहाल सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने का कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। हालांकि, अदालत ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए प्रतिवादियों को तीन दिनों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज कर रहे डॉक्टरों द्वारा आवश्यक समझे जाने वाले चिकित्सा हस्तक्षेप में सहयोग करें। केंद्र ने अदालत को यह भी बताया कि वांगचुक से जुड़ी सभी मेडिकल रिपोर्ट नियमित रूप से उनके परिवार के साथ साझा की जाएंगी। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।

पत्नी आंगमों ने अस्पताल से स्थानांतरित करने की  याचिका दाखिल की थी 

गीतांजलि आंगमो ने अपनी याचिका में सोनम वांगचुक को तत्काल डिस्चार्ज करने, परिवार की पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने, उनके वकीलों और इलाज की निगरानी कर रहे डॉक्टरों को unrestricted access देने और उनके पूरे मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की थी।

यह याचिका दिल्ली हाई कोर्ट की पहले की डिवीजन बेंच के उस आदेश के बाद दायर की गई थी, जिसमें सरकारी डॉक्टरों को वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया था।