नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के कई मामलों में बड़ा झटका देते हुए उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए उन्हें प्रोबेशन (परिवीक्षा) का लाभ देने से भी इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) की धारा 138 के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए राजपाल यादव की सभी पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने निर्देश दिया कि पहले से अदालत में जमा कराए गए 2.25 करोड़ रुपये, जो शिकायतकर्ता को जारी किए जा चुके हैं, उन्हें कुल देय राशि में समायोजित किया जाएगा।

सात चेक के बाउंस होने पर भुगतनी होगी तीन-तीन महीने की सज़ा

साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि राजपाल यादव को सातों चेक बाउंस मामलों में तीन-तीन महीने की सजा भुगतनी होगी। हालांकि, सभी सजाएं एक साथ (समवर्ती रूप से) चलेंगी। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए जुर्माने का भुगतान करने का भी निर्देश दिया और कहा कि जुर्माना नहीं चुकाने पर छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को आदेश का पालन करने या सक्षम अदालत में कानूनी चुनौती देने के लिए दो महीने का समय दिया है।

प्रोबेशन से क्यों किया इनकार?

अदालत ने कहा कि सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के आचरण को देखते हुए उन्हें प्रोबेशन का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने माना कि उन्होंने कई बार कोर्ट में दिए गए अपने आश्वासनों और वचनों का पालन नहीं किया।

यह फैसला 2 अप्रैल को सुनवाई पूरी होने के बाद सुरक्षित रख लिया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कई कोशिशें कीं, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजपाल यादव के बदलते रुख पर भी नाराजगी जताई थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि उनके पहले दिए गए आश्वासन और बाद के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास है।

समझौते की कोशिश रही नाकाम

शिकायतकर्ता कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश अधिवक्ता अवनीश सिक्का ने दलील दी थी कि राजपाल यादव ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि स्वीकार कर चुके थे और अब अपनी वित्तीय जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। अदालत के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये में पूर्ण और अंतिम समझौते के लिए भी तैयार हो गई थी। अदालत ने 3 करोड़ रुपये की चरणबद्ध भुगतान व्यवस्था का सुझाव भी दिया, लेकिन अंतिम सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने इसे स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने अदालत से कहा कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, अपनी संपत्ति बेचनी पड़ी है और वे पहले ही काफी राशि का भुगतान कर चुके हैं। समझौता नहीं होने पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आचरण, आश्वासनों के उल्लंघन को देखते हुए प्रोबेशन देने से इनकार

फैसले के बाद शिकायतकर्ता पक्ष के वकील अवनीश सिक्का ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है और राजपाल यादव की सभी पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने उनके आचरण और बार-बार दिए गए आश्वासनों के उल्लंघन को ध्यान में रखते हुए प्रोबेशन देने से भी इनकार कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने बकाया राशि का आंशिक भुगतान किए जाने के आधार पर राजपाल यादव को अंतरिम जमानत दी थी। यह मामला कई चेक अनादरण (चेक बाउंस) शिकायतों से जुड़ा है, जिनमें ट्रायल कोर्ट पहले ही उन्हें दोषी ठहरा चुकी थी।