रोहतक-सिरसा, हरियाणा: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिनों की पैरोल मिली है। मंगलवार, 25 अगस्त 2026 की सुबह करीब 6:05 बजे वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला और काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम के लिए रवाना हुआ। यह 2020 के बाद उसकी 17वीं अस्थायी रिहाई है।
पैरोल मिलने के बाद राम रहीम को इस बार 21 दिनों तक सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहने की अनुमति दी गई है। प्रशासन की ओर से उसकी आवाजाही और पैरोल की शर्तों के पालन पर नजर रखी जाएगी। राम रहीम इससे पहले 26 जून 2026 को अपनी पिछली अस्थायी रिहाई की अवधि पूरी करने के बाद सुनारिया जेल वापस लौटा था। करीब दो महीने बाद अब उसे फिर 21 दिनों के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है।
7 साल में 17वीं बार अस्थायी रिहाई
राम रहीम को अक्टूबर 2020 से अब तक पैरोल और फरलो मिलाकर कुल 17 बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है। इस दौरान उसे अलग-अलग मौकों पर एक दिन से लेकर 50 दिनों तक की अस्थायी रिहाई मिली है। अगस्त 2026 की यह 21 दिन की रिहाई इस सूची में 17वीं है। इससे पहले मई 2026 में उसे 30 दिन की पैरोल मिली थी। जनवरी 2026 में भी उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी। इससे पहले अगस्त 2025 में उसे 40 दिन की अस्थायी रिहाई मिली थी।
#WATCH | Sirsa, Haryana: Rape convict Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim Singh arrived at the Dera headquarters in Sirsa from Sunaria Jail after being granted 21-day parole pic.twitter.com/Q7WKr98dvG
— ANI (@ANI) August 25, 2026
किन मामलों में सजा काट रहा है राम रहीम?
गुरमीत राम रहीम सिंह दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और इस मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। इसके अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी उसे दोषी ठहराया गया था। वह रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है।
बार-बार पैरोल पर उठते रहे हैं सवाल
राम रहीम को लगातार मिल रही अस्थायी रिहाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि गंभीर अपराधों में दोषी व्यक्ति को बार-बार पैरोल या फरलो मिलने से न्याय व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक बहस तेज होती है। हालांकि, प्रत्येक रिहाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक आदेशों के तहत मंजूर की जाती है। हुशियारपुर से विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा ने भी ताजा पैरोल पर सवाल उठाते हुए इसे “राजनीतिक पैरोल” बताया है। उन्होंने ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की अपील की।
पैरोल और फरलो में क्या अंतर है?
पैरोल और फरलो दोनों अस्थायी रिहाई से जुड़े कानूनी प्रावधान हैं, लेकिन दोनों की प्रकृति और शर्तों में अंतर होता है। राम रहीम की पिछली रिहाइयों में कुछ को पैरोल और कुछ को फरलो के रूप में दर्ज किया गया है।
पैरोल (Parole) क्या है?
- कारण: पैरोल पाने के लिए कोई ठोस और विशिष्ट कारण होना जरूरी है, जैसे परिवार में किसी की मृत्यु, किसी की शादी या खुद की गंभीर बीमारी।
- अधिकार: यह कैदी का अधिकार नहीं है। प्रशासन और अदालत तय करते हैं कि कारण सही है या नहीं।
- सजा की अवधि: पैरोल का समय कैदी की कुल सजा में नहीं जोड़ा जाता है। यानी जितने दिन कैदी बाहर रहेगा, उतने दिन की सजा उसे जेल लौटकर पूरी करनी होगी।
फरलो (Furlough) क्या है?
- कारण: यह कैदी को बिना किसी खास या आपातकालीन वजह के दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कैदी का सामाजिक व पारिवारिक संपर्क बनाए रखना और जेल की एकरसता को तोड़ना है। यह आमतौर पर लंबे समय की सजा काट रहे कैदियों को मिलती है।
- अधिकार: इसे कैदी का एक प्रकार का योग्य हक या प्रोत्साहन माना जाता है।
- सजा की अवधि: फरलो की अवधि कैदी की कुल सजा में जोड़ी (काउंट की) जाती है।
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