नई दिल्ली: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स की कड़ी आलोचना की। गिल्ड ने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल करने वाले पत्रकारों को ‘दिमागी नक्सल’ बताकर निशाना बनाया जा रहा है। विवाद में वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया टुडे टीवी एंकर राजदीप सरदेसाई का नाम सामने आने के बाद मामला और गरमा गया। विवाद की शुरुआत बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई टिप्पणी से हुई। उन्होंने ‘इंटेलेक्चुअल नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि ऐसे लोग नक्सलियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं और उन्हें वैचारिक समर्थन देते हैं। त्रिवेदी ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे लोग सुरक्षा बलों की मौत का जश्न मनाते हैं और संसद के माध्यम से समाधान तलाशने के बजाय सड़कों पर आंदोलन का समर्थन करते हैं। इसके बाद बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स ने एक वीडियो के जरिए इस नैरेटिव को आगे बढ़ाया, जिसमें राजदीप सरदेसाई का नाम भी शामिल था।
एडिटर्स गिल्ड ने राजदीप सरदेसाई का किया बचाव
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बीजेपी के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई। गिल्ड ने कहा कि राजदीप सरदेसाई लंबे समय से पत्रकार और टीवी एंकर के तौर पर समाचारों को प्रस्तुत और उनका विश्लेषण करते रहे हैं। गिल्ड के मुताबिक, उनके पत्रकारिता कार्य को किसी भी तरह से ‘दिमागी नक्सल’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
Statement Condemning BJP’s Video Portraying Journalists as ‘Dimagi Naxal’ pic.twitter.com/TRVU4xEpfk
— Editors Guild of India (@IndEditorsGuild) August 24, 2026
‘सत्तारूढ़ दल के आधिकारिक हैंडल से हमला ज्यादा चिंताजनक’
एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि इस पूरे मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि पत्रकार को निशाना बनाने वाला कंटेंट किसी हाशिये के संगठन की ओर से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स से सामने आया। गिल्ड ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम भारत की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचाते हैं और संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मीडिया अधिकारों को कमजोर करते हैं।
प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक का भी किया जिक्र
एडिटर्स गिल्ड ने भारत में स्वतंत्र मीडिया के लिए कम होते स्थान को लेकर भी चिंता जताई। गिल्ड ने रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के 2026 वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा कि भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर है। गिल्ड के अनुसार, 2025 में भारत 151वें स्थान पर था और 2026 में छह स्थान नीचे आया। RSF ने भारत को ‘वेरी सीरियस’ श्रेणी में रखा है और पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, मीडिया स्वामित्व के केंद्रीकरण तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और मानहानि कानूनों के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों का उल्लेख किया है।
‘असहमति और सवाल लोकतंत्र का हिस्सा’
एडिटर्स गिल्ड ने बीजेपी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अपील की कि पत्रकारों को उनके पेशेवर काम के लिए सार्वजनिक दुश्मन के तौर पर पेश करना बंद किया जाए। गिल्ड ने कहा कि सत्ता से सवाल करना, असहमति व्यक्त करना और सरकार की नीतियों की जांच-पड़ताल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। पत्रकारों को इस तरह के लेबल देना स्वतंत्र मीडिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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