मुंबई: महाराष्ट्र में गणेश उत्सव शुरू होने से पहले ही DJ और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 14 सितंबर से शुरू होने वाले 11 दिवसीय गणेश उत्सव के दौरान डीजे के इस्तेमाल को लेकर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ रही है। बीजेपी, शिवसेना और NCP से जुड़े नेताओं के बयानों ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे दिया है।
विवाद की शुरुआत मुख्य रूप से पुणे में गणेश उत्सव और गणेश विसर्जन के दौरान तेज आवाज में DJ बजाने पर रोक लगाने की मांग से हुई। एक तरफ विपक्ष और कुछ नेता हाई-डेसिबल साउंड सिस्टम के खिलाफ सख्त रुख की मांग कर रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेता इसे धार्मिक उत्सव की परंपरा और उत्साह से जोड़कर देख रहे हैं।
नवनीत राणा के बयान से बढ़ा विवाद
इस पूरे विवाद में बीजेपी नेता और पूर्व निर्दलीय सांसद नवनीत राणा का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को गणेश उत्सव के दौरान DJ बजने से परेशानी होती है, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।
राणा ने इसी संदर्भ में मस्जिदों में नमाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पहले वहां लगे लाउडस्पीकर पर रोक लगनी चाहिए। उनके बयान के बाद DJ विवाद सीधे धार्मिक और राजनीतिक बहस से जुड़ गया।
हालांकि, महायुति के भीतर इस मुद्दे पर एक जैसी राय नहीं दिखाई दे रही है।
बीजेपी में भी DJ को लेकर अलग-अलग राय
बीजेपी के भीतर भी गणेश उत्सव में तेज आवाज वाले संगीत को लेकर मतभेद सामने आए हैं। पुणे शहर बीजेपी अध्यक्ष धीरज घाटे ने गणेश उत्सव और विसर्जन के दौरान DJ तथा ढोल-ताशों के इस्तेमाल का समर्थन किया है।
उनका रुख पार्टी की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी से अलग है। कुलकर्णी ने त्योहारों के दौरान DJ और तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का विरोध किया है।
मेधा कुलकर्णी का कहना है कि धार्मिक त्योहारों को अनुशासन और मर्यादा के साथ मनाया जाना चाहिए। उन्होंने तेज संगीत का विरोध करते हुए कहा कि किसी भी तरह का उत्सव सभ्य तरीके से होना चाहिए और त्योहार मनाने के तरीके की वजह से हिंदुत्व की छवि खराब नहीं होनी चाहिए।
इस तरह एक ही पार्टी के नेताओं के बयान इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख को सामने ला रहे हैं।
पुणे से पूरे महाराष्ट्र तक पहुंचा विवाद
गणेश उत्सव महाराष्ट्र के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है और पुणे की गणेश उत्सव परंपरा विशेष रूप से चर्चित रही है। ऐसे में DJ, ढोल-ताशे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर उठी बहस का राजनीतिक असर केवल पुणे तक सीमित नहीं रहा।
एक ओर तेज आवाज से होने वाली परेशानी और अनुशासन की बात उठ रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ नेता इसे उत्सव की परंपरा और सार्वजनिक भागीदारी से जोड़ रहे हैं। इसी वजह से महायुति के भीतर भी इस मुद्दे पर एकमत नजर नहीं आ रहा।
शिवसेना, बीजेपी और NCP के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के बीच अब यह देखना अहम होगा कि सरकार गणेश उत्सव के दौरान धार्मिक आयोजन, सार्वजनिक सुविधा और ध्वनि से जुड़े नियमों के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।
धार्मिक त्योहार और सियासी बयानबाजी
DJ को लेकर शुरू हुई बहस अब सिर्फ आवाज की सीमा या प्रशासनिक नियमों तक सीमित नहीं रह गई है। नवनीत राणा के बयान ने इसे राजनीतिक और धार्मिक बहस का मुद्दा बना दिया है, जबकि मेधा कुलकर्णी जैसे नेताओं ने त्योहारों में अनुशासन और मर्यादा पर जोर दिया है।
गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर 11 दिनों तक चलेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में DJ और लाउडस्पीकर को लेकर प्रशासनिक फैसले और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस विवाद को और हवा दे सकती हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गणेश उत्सव में DJ को लेकर महायुति अपने घटक दलों और नेताओं के अलग-अलग रुख के बीच कोई साझा नीति बना पाएगी? पुणे से शुरू हुई यह बहस अब महाराष्ट्र की सियासत में गठबंधन के अंदर मौजूद मतभेदों को भी उजागर कर रही है।
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