नई दिल्ली: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा Ground-Based Broadcasters (GBB) के लिए नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की सिफारिश का GTC Network के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं प्रेसिडेंट रबींद्र नारायण ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' विजन को मजबूती देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि भारतीय ब्रॉडकास्टर्स हर साल विदेशी सैटेलाइट कंपनियों को ट्रांसपोंडर और अपलिंक सेवाओं के लिए लाखों डॉलर का भुगतान करते हैं। यदि TRAI की सिफारिशें लागू होती हैं तो इस विदेशी मुद्रा (Forex) की बड़ी बचत होगी और देश की आर्थिक मजबूती बढ़ेगी।
"एक हस्ताक्षर, करोड़ों की बचत"
मैनेजिंग डायरेक्टर एवं प्रेसिडेंट रबींद्र नारायण ने पोस्ट में लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि भारत डॉलर बचाए और अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए। TRAI पहले ही अनिवार्य सैटेलाइट अपलिंकिंग की शर्त हटाने तथा ब्रॉडबैंड, फाइबर और क्लाउड आधारित वितरण का रास्ता खोलने की सिफारिश कर चुका है। अब सिर्फ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को इसे लागू करने की आवश्यकता है। एक हस्ताक्षर, करोड़ों की बचत।"
Every year, Indian broadcasters wire millions of dollars abroad just to rent space on foreign satellites.PM Modi wants us saving dollars and guarding our forex. Here's a clean way to do exactly that.TRAI has already recommended dropping the mandatory satellite uplinking clause… pic.twitter.com/UceTPEl7Dt
— Rabindra Narayan (@RabindraGTC) June 30, 2026
TRAI की प्रमुख सिफारिशें
TRAI ने सुझाव दिया है कि ब्रॉडकास्टर्स अब केवल सैटेलाइट के माध्यम से ही नहीं, बल्कि फाइबर, ब्रॉडबैंड, इंटरनेट, वाई-फाई, सेल्युलर नेटवर्क और क्लाउड जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए भी अपने चैनलों को डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स (DPOs) तक पहुंचा सकेंगे।
प्रमुख सिफारिशों में शामिल हैं—
- ब्रॉडकास्टर्स को तकनीक चुनने की पूरी स्वतंत्रता मिलेगी।
- Ground-Based Broadcasters राष्ट्रीय स्तर पर सेवाएं दे सकेंगे।
- आवश्यकता पड़ने पर GBB ऑपरेटर सैटेलाइट मॉडल भी अपना सकेंगे।
- FAST (Free Ad-Supported Streaming TV) चैनलों के लिए अलग निगरानी व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की गई है।
- उद्योग को क्या होगा फायदा?
- यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो—
- विदेशी सैटेलाइट कंपनियों पर निर्भरता कम होगी।
- करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- भारत के फाइबर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक उपयोग होगा।
- छोटे और क्षेत्रीय ब्रॉडकास्टर्स की लागत घटेगी।
- लाइव प्रसारण की गुणवत्ता और गति में सुधार होगा।
- 'डिजिटल इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' अभियान को नई गति मिलेगी।
'तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सक्षम बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम'
GTC Network के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं प्रेसिडेंट रबींद्र नारायण ने कहा कि यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब सभी की निगाहें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) पर हैं, जिसके अंतिम निर्णय के बाद भारतीय ब्रॉडकास्टिंग उद्योग में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।
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