पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने हवारा की पंजाब में शिफ्टिंग का विरोध किया। एजेंसी ने अदालत को सौंपी अपनी रिपोर्ट में उसे हाई रिस्क कैदी बताते हुए आशंका जताई कि उसे पंजाब भेजने से राज्य की कानून-व्यवस्था और आगामी विधानसभा चुनावों पर असर पड़ सकता है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान IB की रिपोर्ट को गंभीर बताया। अदालत में हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस. मुरलीधर ने दलील दी कि यदि चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं, तो मामले की सुनवाई तीन महीने बाद की जा सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई फरवरी 2027 में निर्धारित कर दी।

पंजाब विधानसभा की 117 सीटों के लिए 2027 की शुरुआत में चुनाव होने हैं। ऐसे में हवारा के जेल स्थानांतरण का मामला सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।

IB ने क्यों जताई पंजाब में शिफ्टिंग पर आपत्ति?

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने हवारा के पुराने जेल रिकॉर्ड और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हवारा पहले जेल से फरार होने की घटना में शामिल रहा है। इसके अलावा चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में सुरंग खोदकर भागने के मामले में भी उसे दोषी ठहराया गया था।

भाटी ने हाई रिस्क कैदियों के स्थानांतरण को लेकर गृह मंत्रालय की एडवाइजरी का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि ऐसे कैदी को दूसरी जेल में भेजने से सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। पंजाब सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उसके स्थानांतरण से राज्य की कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।

IB की रिपोर्ट में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान संभावित प्रभाव को भी महत्वपूर्ण चिंता बताया गया है। हालांकि, यह एजेंसी का सुरक्षा आकलन है, किसी संभावित घटना की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

हवारा ने क्यों मांगा पंजाब की जेल में स्थानांतरण?

जगतार सिंह हवारा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि उसे तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में भेजा जाए। याचिका में कहा गया है कि वह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का निवासी है और जिस मामले में उसे उम्रकैद मिली है, वह भी पंजाब से संबंधित है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई है कि दिल्ली में उसके खिलाफ कोई अन्य मामला लंबित नहीं है। याचिका के मुताबिक, बेअंत सिंह हत्याकांड के बाद उसके खिलाफ 36 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से एक को छोड़कर बाकी में उसे बरी किया जा चुका है।

हवारा की ओर से यह भी कहा गया है कि जनवरी 2004 में जेल से फरार होने की घटना के अलावा जेल में उसका आचरण अच्छा रहा है। याचिका में उसकी बेटी के पंजाब में रहने का भी उल्लेख किया गया है। उसके पक्ष का तर्क है कि कई साल पुराने सुरक्षा आकलन के आधार पर उसे लगातार दिल्ली में रखने का फैसला उचित नहीं है।

2004 में बुड़ैल जेल से सुरंग बनाकर भागा था हवारा

हवारा के स्थानांतरण का विरोध करने के पीछे उसका पुराना जेल रिकॉर्ड भी एक प्रमुख आधार है। 22 जनवरी 2004 को चंडीगढ़ की हाई-सिक्योरिटी बुड़ैल जेल में बंद हवारा, परमजीत सिंह भ्योरा, तारा और देवी सिंह ने कथित तौर पर करीब 100 फुट लंबी सुरंग बनाकर जेल से फरार होने में सफलता हासिल की थी।

बाद में हवारा और भ्योरा को गिरफ्तार कर लिया गया था। तारा को थाईलैंड में पकड़ा गया, जबकि देवी सिंह को फरार घोषित किया गया। इस घटना को केंद्र सरकार की ओर से हवारा की सुरक्षा श्रेणी और स्थानांतरण से जुड़े जोखिमों के संदर्भ में उठाया गया है।

बेअंत सिंह हत्याकांड में मिली थी मौत की सजा

31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए बम विस्फोट में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह सहित 17 लोगों की मौत हो गई थी। इस हत्याकांड में जगतार सिंह हवारा को दोषी ठहराया गया था।

मार्च 2007 में ट्रायल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। बाद में अक्टूबर 2010 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि उसे जीवनभर जेल में रखा जाए और रिहाई न दी जाए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस फैसले को लेकर अभियोजन और हवारा, दोनों पक्षों की अपीलें सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

फरवरी 2027 में फिर होगी सुनवाई

हवारा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले केंद्र सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और दिल्ली तथा पंजाब सरकारों से जवाब मांगा था। अब सुनवाई के दौरान IB की रिपोर्ट और पंजाब सरकार की सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर चर्चा हुई।

एक ओर हवारा की तरफ से पंजाब में स्थानांतरण को लेकर व्यक्तिगत और कानूनी आधार रखे गए हैं, वहीं केंद्र और पंजाब सरकार की ओर से सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाएं सामने रखी गई हैं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने जेल स्थानांतरण पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अगली सुनवाई फरवरी 2027 में होगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत कैदी के अधिकारों, जेल सुरक्षा और राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।