कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में भारत का परचम लहराने वाले दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा ने 49 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन से भारतीय खेल जगत में शोक की लहर है।
भारतीय खेल इतिहास के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। 49 वर्ष की आयु में उनका निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। खिलाड़ी, कोच और प्रेरणास्रोत के रूप में उनकी पहचान देश की खेल विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, राजनीतिक हस्तियों और लाखों प्रशंसकों ने गहरा शोक व्यक्त किया।
उत्तराखंड के एक खेल-प्रेमी परिवार में जन्मे जसपाल राणा ने बहुत कम उम्र में ही निशानेबाजी की दुनिया में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। उनके पिता ने उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया और जल्द ही उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना ली। किशोरावस्था में ही उन्होंने ऐसे प्रदर्शन किए, जिनसे यह साफ हो गया था कि वह भविष्य में भारत के बड़े खेल सितारों में शामिल होंगे।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर जसपाल राणा की पहचान 1990 के दशक में तेजी से बनी। उन्होंने विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दिलाईं। विशेष रूप से पिस्टल शूटिंग स्पर्धाओं में उनकी सटीकता और मानसिक मजबूती की खूब सराहना की जाती थी।
कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार अध्यायों में गिना जाता है। उन्होंने कई संस्करणों में लगातार पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। यही वजह है कि उन्हें कॉमनवेल्थ खेलों के सबसे सफल भारतीय खिलाड़ियों में शामिल किया जाता है।
एशियन गेम्स में भी जसपाल राणा ने शानदार प्रदर्शन किया और कई महत्वपूर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी उपलब्धियों ने भारत में शूटिंग खेल को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस दौर में जब शूटिंग को सीमित लोकप्रियता मिलती थी, राणा ने अपने प्रदर्शन से इस खेल को देशभर में चर्चा का विषय बना दिया।
जसपाल राणा की प्रमुख उपलब्धियां
- कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते
- 9 स्वर्ण पदक, 4 रजत पदक और 2 कांस्य पदक हासिल किए
- चार अलग-अलग कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया
- एशियन गेम्स में कई स्वर्ण और रजत पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया
- अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विश्व स्तरीय प्रदर्शन के लिए पहचान बनाई
- भारतीय शूटिंग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया
सम्मान और पुरस्कार
- अर्जुन पुरस्कार (1994)
- पद्मश्री (1997)
- द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020)
- कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल सम्मान
खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग को अपना मिशन बना लिया। उन्होंने युवा निशानेबाजों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी अकादमी से निकले कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर समेत कई युवा खिलाड़ियों के करियर को दिशा देने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती पर आधारित थी। खिलाड़ियों के बीच वह एक कठोर लेकिन प्रेरणादायक कोच के रूप में जाने जाते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई प्रमुख नेताओं और खिलाड़ियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें भारतीय खेल जगत का अमूल्य रत्न बताते हुए उनकी उपलब्धियों को याद किया।
Deeply saddened by the passing of Shri Jaspal Rana Ji. His passing is a profound loss to the world of Indian sports.He brought immense glory to the nation through his extraordinary achievements in shooting. Equally remarkable was his contribution as a mentor, shaping and…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 12, 2026
जसपाल राणा का जाना केवल एक खिलाड़ी का निधन नहीं, बल्कि भारतीय शूटिंग के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। उन्होंने अपने प्रदर्शन, समर्पण और कोचिंग के जरिए जिस विरासत को बनाया, वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।
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