नई दिल्ली, भारत: वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने शनिवार को कहा कि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख विजय तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध के खिलाफ अदालत का रुख कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप के कई उदाहरण पहले भी मौजूद हैं।
तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर मीडिया से रोहतगी ने कहा, “विजय अदालत जा सकते हैं। मैंने देखा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहले ही एक याचिका दायर की जा चुकी है, हालांकि मुझे नहीं पता कि किसने दायर की है। अदालत निश्चित रूप से हस्तक्षेप कर सकती है, जैसा कि उसने कई मामलों में किया है।”
खुद कई ऐसे मामलों में पेश हो चुके हैं रोहतगी
सरकार गठन से जुड़े पुराने संवैधानिक विवादों का जिक्र करते हुए रोहतगी ने कहा कि वह खुद कई ऐसे मामलों में पेश हो चुके हैं, जिनमें 2018 का बीएस येदियुरप्पा मामला भी शामिल है। उन्होंने कहा, “मैंने खुद कई मामलों को संभाला है, जिसकी शुरुआत 2018 में येदियुरप्पा के फ्लोर टेस्ट से हुई थी। उस मामले में अदालत ने आधी रात की सुनवाई के दौरान अगले ही दिन फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था और वह उसमें विफल रहे थे।”
#WATCH | Delhi: On Tamil Nadu politics, Senior Advocate and Former Attorney General of India, Mukul Rohatgi says, "... According to me, Vijay should have been asked by the Governor on day one to come and form the government. Even if he was ten short of the magic number, it did… pic.twitter.com/tQJJLq2RBf
— ANI (@ANI) May 9, 2026
"विजय को अब तक सरकार बनाने का निमंत्रण क्यों नहीं दिया"
रोहतगी ने कहा कि उस समय कम समय देने का कारण संभावित हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका थी। तमिलनाडु की मौजूदा स्थिति से तुलना करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता के रूप में उभरने के बावजूद विजय को अब तक सरकार बनाने का निमंत्रण क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “इस व्यक्ति को 4 मई को जनादेश मिला और आज 9 मई है, फिर भी उसे मौका नहीं दिया गया। मेरा मानना है कि यह गलत है।”
रोहतगी ने राज्य में दोबारा चुनाव या राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना पर भी चिंता जताई और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों विकल्प अलोकतांत्रिक होंगे। उन्होंने कहा, “हमें न तो नए चुनाव की स्थिति में जाना चाहिए और न ही राष्ट्रपति शासन की ओर, क्योंकि दोनों ही हालात में यह अलोकतांत्रिक होगा। राष्ट्रपति शासन अंततः फिर चुनाव की ओर ले जाएगा, जो तुरंत संभव नहीं है। इसमें तीन-चार महीने लगेंगे और मेरे विचार से यह विनाशकारी होगा।”
सरकार गठन को लेकर गतिरोध जारी
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर गतिरोध लगातार बना हुआ है। विजय ने शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन राज्यपाल आरवी अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।
234 सदस्यीय विधानसभा में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के जरिए समर्थन दिया है, जबकि वाम दलों के चार विधायकों के समर्थन से गठबंधन का आंकड़ा 116 तक पहुंच गया है, जो बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से अभी भी दो कम है। अब विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) की भूमिका पर नजरें टिकी हैं। पार्टी के दो विधायक हैं और उसका समर्थन विजय को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचा सकता है।