उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए हालिया बयान से प्रदेश की सियासत गरमा सकती है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान मौर्य ने मदरसों पर बेहद तीखी टिप्पणी की और कहा कि चाहे मदरसा बांग्लादेश, पाकिस्तान या भारत का हो, उनके अनुसार यह ‘अघोषित तौर पर आतंकवादियों को पैदा करने की फैक्ट्री’ है।
उपमुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षा से जुड़े कानून में संशोधन के प्रस्ताव पर आगे बढ़ रही है। ऐसे में उनके बयान को इस मुद्दे पर चल रही राजनीतिक बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।
मदरसों पर केशव मौर्य का बड़ा बयान
केशव प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मदरसा चाहे बांग्लादेश का हो या पाकिस्तान का, या भारत का हो, वास्तव में वो अघोषित तौर से आतंकवादियों को पैदा करने की फैक्ट्री है।” उनके इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। हालांकि, विपक्षी दलों की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
लखनऊ में यूपी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान"मदरसा कहीं भी हो, आतंकवाद ही पैदा करता है"#KeshavPrasadMaurya #मदरसा pic.twitter.com/TpbwtJ4nMl
— Shekhar Upadhyay 🇮🇳 (@ShekharUpLive) August 3, 2026
मदरसा शिक्षा से जुड़े संशोधन पर सरकार की नजर
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कानून में बदलाव के प्रस्ताव पर काम कर रही है। सरकार के एजेंडे में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम, 2004 में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल रहा है। इस प्रस्ताव के तहत मदरसों में ‘कामिल’ और ‘फाजिल’ डिग्री दिए जाने से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जाना है। ऐसे में केशव मौर्य का बयान इस पूरे मुद्दे को और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना सकता है।
विधानसभा का मानसून सत्र भी शुरू
वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र भी शुरू हो गया है। सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।माना जा रहा है कि मदरसा शिक्षा से जुड़े प्रस्ताव और अब केशव मौर्य के बयान को लेकर विपक्ष सरकार को घेर सकता है। हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ सकती है बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। सरकार जहां शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और नियमन की बात करती रही है, वहीं विपक्ष ऐसे मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता रहा है। अब उपमुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद यह देखना अहम होगा कि विपक्ष इस पर क्या रुख अपनाता है और विधानसभा के भीतर इस मुद्दे को किस तरह उठाया जाता है।
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