केजरीवाल पर रोक की मांग खारिज, दिल्ली HC सख्त, बोला- ‘कानून में ऐसा कोई आधार नहीं’
नई दिल्ली: Delhi High Court ने बुधवार को उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें Aam Aadmi Party (AAP) का पंजीकरण रद्द करने और Arvind Kejriwal, Manish Sisodia तथा दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि यह याचिका “गलत धारणा पर आधारित” है और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जो चुनाव आयोग को इस आधार पर किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देता हो।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा ने दलील दी कि राजनीतिक दलों के जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को संवैधानिक मूल्यों का पालन करना चाहिए और अदालत की कार्यवाही को प्रभावित करने वाले कथित बयानों पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत कोर्ट चुनाव आयोग को किसी पार्टी को डीरजिस्टर करने का निर्देश दे सकता है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा:
“आप चाहते हैं कि हम चुनाव आयोग को पार्टी का पंजीकरण रद्द करने का निर्देश दें। कृपया वह धारा बताइए।”
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि संबंधित नेताओं का आचरण संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी को दर्शाता है। हालांकि अदालत ने कहा कि जिन आरोपों का उल्लेख किया गया है, उनसे संबंधित अवमानना कार्यवाही पहले से लंबित है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, तो उसके लिए Contempt of Courts Act के तहत कार्रवाई का प्रावधान है और उसके परिणाम संबंधित व्यक्ति को ही भुगतने होंगे।
अदालत ने यह भी कहा कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा 20 अप्रैल को आबकारी नीति मामले में पारित आदेश को केवल उसी आपराधिक पुनरीक्षण कार्यवाही के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए, उससे आगे नहीं।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के “इंडियन नेशनल कांग्रेस (I)” मामले के फैसले का भी उल्लेख किया और कहा कि किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करना बेहद गंभीर विषय है। अदालत ने कहा कि एक बार पंजीकरण मिलने के बाद चुनाव आयोग के पास सामान्य समीक्षा की व्यापक शक्ति नहीं होती।
यह PIL सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत में चल रही कार्यवाही को लेकर ऐसे बयान और आचरण किया, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29A(5) का उल्लंघन है।
हालांकि हाई कोर्ट ने अंत में कहा कि यह मामला उन सीमित कानूनी आधारों में नहीं आता, जिनके तहत किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। अदालत ने याचिका को “बिना मेरिट” बताते हुए खारिज कर दिया।