दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर अपने ही जवानों का प्रदर्शन, दो अधिकारियों के तबादले पर उठाए सवाल

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर सोमवार को करीब 80 पुलिसकर्मियों ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के खिलाफ विरोध जताया। जवानों ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर अपनी बात रखने और दोनों अधिकारियों की पुरानी तैनाती बहाल करने की मांग की।

By  Laxman November 2nd 2026 01:17 PM

दिल्ली में कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस के जवान सोमवार सुबह खुद अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर करीब 80 पुलिसकर्मी जुटे और दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले के फैसले पर नाराजगी जताई। प्रदर्शन कर रहे जवानों की मांग थी कि पुलिस कमिश्नर उनसे सीधे बातचीत करें और दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी तैनाती पर वापस भेजने पर विचार किया जाए।

घटना के दौरान पुलिस मुख्यालय के बाहर कुछ समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जवानों को समझाने का प्रयास किया। डीसीपी (नई दिल्ली) सचिन शर्मा ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ सहित अन्य पुलिसकर्मियों से बातचीत की। उन्होंने जवानों को विभागीय अनुशासन बनाए रखने की नसीहत दी और कहा कि पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।

सचिन शर्मा ने कुछ जवानों से पुलिस मुख्यालय के अंदर चलकर अपनी बात रखने का आग्रह भी किया, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए। प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों की मांग थी कि पुलिस कमिश्नर उनके साथ संपर्क सभा करें, ताकि वे अधिकारियों के तबादले को लेकर अपनी बात सीधे रख सकें। हालांकि, मुख्यालय से कोई वरिष्ठ अधिकारी बाहर आकर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने नहीं पहुंचा।

आखिर क्यों नाराज हैं दिल्ली पुलिस के जवान?

इस विरोध प्रदर्शन की वजह गांधी नगर सब-डिवीजन में तैनात एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई एक घटना के बाद की गई थी। इस घटना में एक वकील के सिर पर हाथापाई के दौरान गंभीर चोट आई थी।

मामले के बाद जिला अदालत के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। वकीलों की ओर से संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी। इसके बाद दोनों अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए गए। 28 अक्टूबर को वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी थी।

हालांकि, इन तबादलों के बाद दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मचारियों में असंतोष देखने को मिला। प्रदर्शन कर रहे जवानों का उद्देश्य दोनों अधिकारियों के समर्थन में आवाज उठाना और उनके तबादले के फैसले पर पुलिस कमिश्नर के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराना था।

व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए जुटने की अपील

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप में संदेश भेजकर जवानों से सोमवार सुबह पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंचने की अपील की गई थी। इन संदेशों के जरिए पुलिसकर्मियों को दोनों अधिकारियों के समर्थन में एकजुट होने और उनकी पुरानी पोस्टिंग बहाल करने की मांग उठाने के लिए कहा गया था।

दूसरी ओर, सभी जिलों के डीसीपी और विभिन्न यूनिट के प्रमुखों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पुलिस मुख्यालय पहुंचने से रोकें। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मुख्यालय के बाहर एकत्र हो गए।

एलजी के संवाद कार्यक्रम से पहले घटनाक्रम

दिल्ली पुलिस के भीतर यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मंगलवार, 3 नवंबर को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू का पुलिसकर्मियों के साथ संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है। ऐसे में दो अधिकारियों के तबादले को लेकर जवानों की नाराजगी और मुख्यालय के बाहर उनका जुटना विभाग के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

फिलहाल प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों की प्रमुख मांग पुलिस कमिश्नर से सीधी बातचीत की है। इस पूरे मामले ने विभाग के भीतर अनुशासन, अधिकारियों के तबादले और पुलिसकर्मियों की शिकायतों को सुनने की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, प्रदर्शन के बाद दोनों अधिकारियों की तैनाती में किसी बदलाव की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

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