DUSU Election 2026: हिंसा और हंगामे पर हाईकोर्ट सख्त, बोला- हालात नहीं सुधरे तो रद्द हो सकता है चुनाव
DUSU Election 2026 के दौरान हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि हालात नहीं सुधरे तो वोटों की गिनती रोकने से लेकर चुनाव रद्द करने तक का आदेश दिया जा सकता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के दौरान सामने आई हिंसा, उपद्रव और नियमों के उल्लंघन की घटनाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं कर पाते हैं, तो छात्रसंघ चुनाव को रद्द करने का आदेश भी दिया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने चुनाव से जुड़ी घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि हर साल छात्रसंघ चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाओं का दोहराव चिंता का विषय है।
16 सितंबर की घटना के बाद बढ़ी चिंता
16 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में चुनाव प्रचार के दौरान दो छात्र गुटों के बीच हिंसक झड़प की घटना सामने आई थी। इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान वाहनों के काफिले, गाड़ियों से स्टंट, सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी शिकायतों का भी जिक्र किया गया।
इन घटनाओं ने विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव आचार-नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हाईकोर्ट ने इसी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की अपेक्षा की है।
‘अब बहुत हो चुका’, कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान पीठ ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “अब बहुत हो चुका (इनफ इज इनज).” अदालत ने आपराधिक व्यवहार, लापरवाही और गुंडागर्दी जैसी गतिविधियों को लेकर असहमति जताई।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय परिसर में चुनावी गतिविधियों के नाम पर ऐसी घटनाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। अदालत की टिप्पणी का केंद्र चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना रहा।
वोटों की गिनती पर भी लग सकता है ब्रेक
हाईकोर्ट ने केवल भविष्य की घटनाओं को लेकर चेतावनी नहीं दी, बल्कि चुनाव के अगले चरण पर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा है कि यदि प्रशासन और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई संतोषजनक नहीं पाई गई, तो वोटों की गिनती और परिणाम घोषित करने पर रोक लगाई जा सकती है।
इसका मतलब है कि चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद उसके परिणाम की घोषणा अदालत के निर्देशों पर निर्भर हो सकती है।
प्रशासन और पुलिस से मांगी जाएगी रिपोर्ट
अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि चुनाव के दौरान नियमों का उल्लंघन और हिंसक घटनाएं दोबारा न हों। अगली सुनवाई में प्रशासन को अपनी कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि संबंधित अधिकारी यह भरोसा दिलाने में असफल रहते हैं कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है, तो पूरी चुनाव प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश देने पर विचार किया जा सकता है।
DUSU चुनाव पर अब क्या होगा?
फिलहाल हाईकोर्ट की ओर से चुनाव रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया गया है। अदालत ने प्रशासन को स्थिति सुधारने और अपनी कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। अगली सुनवाई में पेश होने वाली रिपोर्ट और अदालत के आकलन से चुनाव की आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।