NEET-UG पेपर लीक ने बदल दी लाखों छात्रों की किस्मत, जानिए पूरा घटनाक्रम...

नीट विवाद का सबसे दर्दनाक पहलू वह मानसिक और भावनात्मक बोझ है, जिसे लाखों छात्रों और उनके परिवारों ने पिछले डेढ़ महीने में झेला है। हर बार जब परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, तो उसकी सबसे बड़ी कीमत उस छात्र को चुकानी पड़ती है, जिसने बिना किसी शॉर्टकट के पूरे साल सिर्फ मेहनत की होती है।

By  Preeti Kamal June 20th 2026 06:02 PM

NEET-UG पेपर लीक ने बदल दी लाखों छात्रों की किस्मत: 3 मई 2026… वह दिन, जब देशभर के लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे थे। लेकिन परीक्षा खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद कथित पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्रों और अनियमितताओं के आरोपों ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को सवालों के घेरे में ला दिया।

कई राज्यों से जांच एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले कि परीक्षा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मैसेजिंग ऐप्स पर कथित तौर पर प्रश्नपत्र बेचने और अभ्यर्थियों को गुमराह करने की कोशिश की गई। इसके बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने जांच के आधार पर परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया और 21 जून को री-एग्जाम की घोषणा की। लेकिन इस फैसले ने करीब 23 लाख छात्रों और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दीं। सालभर की तैयारी, कोचिंग पर खर्च हुए लाखों रुपये और महीनों का मानसिक दबाव, सब कुछ एक बार फिर दांव पर लग गया।

NEET-UG परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

री-एग्जाम से पहले भी छात्रों की परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। प्रयागराज में NTA को ऐन वक्त पर एक परीक्षा केंद्र बदलना पड़ा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हरिवंश राय बच्चन सांस्कृतिक केंद्र में निर्माण कार्य, बिजली की कमी और प्रशासनिक कारणों के चलते अब अभ्यर्थियों को सीनेट हाउस परिसर स्थित नए केंद्र पर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित छात्रों को एक बार फिर अपनी यात्रा और परीक्षा की तैयारी में बदलाव करना पड़ा है।

हालांकि सरकार का दावा है कि इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी, मल्टी-लेयर फ्रिस्किंग और हाई-पावर जैमर लगाए गए हैं। प्रश्नपत्रों को रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक वाले विशेष कंटेनरों में भेजा जा रहा है। कई संवेदनशील क्षेत्रों में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवान तैनात किए गए हैं।

भारतीय वायुसेना ने 200 से ज्यादा उड़ानों के ज़रिए पहुंचाए प्रश्नपत्र

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने भी इस बार अभूतपूर्व अभियान चलाते हुए चार दिनों में 200 से ज्यादा उड़ानों के जरिए 20 से अधिक महत्वपूर्ण केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने में मदद की है। दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से इनकी 24 घंटे निगरानी की जा रही है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ में परीक्षा केंद्रों के 500 मीटर के दायरे में फोटोस्टेट की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्थान, पंजाब और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में परीक्षा केंद्रों पर हाई-डेफिनिशन कैमरे, जैमर और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

सरकार का कहना है कि पेपर लीक की आशंका होते ही परीक्षा रद्द करना ही ईमानदार छात्रों के साथ न्याय है। उत्तर प्रदेश सरकार भी यही दावा कर रही है कि पेपर लीक की आशंका पर परीक्षा रद्द करना जरूरी था। नीट विवाद का सबसे दर्दनाक पहलू वह मानसिक और भावनात्मक बोझ है, जिसे लाखों छात्रों और उनके परिवारों ने पिछले डेढ़ महीने में झेला है। हर बार जब परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, तो उसकी सबसे बड़ी कीमत उस छात्र को चुकानी पड़ती है, जिसने बिना किसी शॉर्टकट के पूरे साल सिर्फ मेहनत की होती है।

सिस्टम की गलतियों का भुगतान छात्र क्यों करें ?

कई छात्रों ने एक नहीं, बल्कि लगातार दो-दो और तीन-तीन साल ड्रॉप लेकर तैयारी की। कई परिवारों ने बच्चों की कोचिंग के लिए कर्ज लिया, जमीन गिरवी रखी, बचत तोड़ी और अपनी जरूरतों में कटौती की। किसी ने घर की शादी टाल दी, तो किसी ने नौकरी छोड़कर बच्चे की तैयारी पर पूरा ध्यान लगाया।लेकिन महीनों की इस तपस्या के बाद अचानक उन्हें बताया गया कि परीक्षा दोबारा होगी। सवाल यही है कि अगर गलती सिस्टम की थी, तो उसकी सजा हमेशा छात्र ही क्यों भुगतें?

री-एग्जाम की घोषणा और छात्रों की आत्महत्या 

परीक्षा रद्द होने और री-एग्जाम की घोषणा के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्रों की आत्महत्या की कई खबरें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स, परिवारों के बयानों और पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 3 मई को हुई परीक्षा रद्द होने और 21 जून को होने वाले री-एग्जाम के बीच कम से कम 11 नीट अभ्यर्थियों की मौत की खबरें सामने आई हैं।

हालांकि इन सभी मामलों की जांच जारी है और कई मामलों में किसी एक वजह को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है, लेकिन परिवारों के बयान, बरामद नोट्स और पुलिस जांच में बार-बार परीक्षा से जुड़ा तनाव, अनिश्चितता और मानसिक दबाव सामने आया है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में 19 वर्षीय छात्रा अनुकीर्तना की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पढ़ाई में बेहद होनहार थी और री-एग्जाम को लेकर दबाव महसूस कर रही थी।

NEET सिर्फ एक परीक्षा नहीं बल्कि छात्रों का भविष्य

राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात से भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां परिवारों ने परीक्षा रद्द होने के बाद बढ़े तनाव और चिंता की बात कही है। इसी बीच नागरिक समाज संगठनों और छात्र समूहों ने मांग की है कि ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए और परीक्षा से जुड़े मानसिक दबाव को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता तंत्र को मजबूत किया जाए।  क्योंकि यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं है। यह लाखों युवाओं के सपनों, उनके आत्मविश्वास और उनके भविष्य का सवाल है।

नीट री-एग्जाम से पहले एक ऐसा कदम उठाया गया, जिसने डिजिटल दुनिया से लेकर अदालत तक बड़ी बहस छेड़ दी है। केंद्र सरकार की सिफारिश पर टेलीग्राम के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगाई गई है। सरकार का आरोप है कि इसी प्लेटफॉर्म पर कई चैनलों और ग्रुप्स के जरिए फर्जी प्रश्नपत्र बेचने, छात्रों को गुमराह करने और पेपर लीक का नेटवर्क चलाया जा रहा था।

टेलीग्राम के इस्तेमाल पर रोक ने छेड़ी बड़ी बहस

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस अस्थायी रोक को बरकरार रखते हुए कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता और लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।लेकिन क्या किसी एक ऐप पर रोक लगाने से पेपर लीक रुक जाएगा? सरकार ने अदालत में दावा किया कि टेलीग्राम के कुछ फीचर्स, खासकर मैसेज एडिटिंग और मल्टीपल बॉट्स की सुविधा का दुरुपयोग किया जा रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, एक अकाउंट से कई बॉट बनाए जा सकते हैं, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

जांच में ऐसे कई चैनलों की पहचान की गई, जिनके नाम 'री-नीट माफिया', 'पेपर लीक' और 'प्राइवेट माफिया' जैसे थे। आरोप है कि ये चैनल पुराने संदेशों को एडिट कर छात्रों को यह भरोसा दिलाते थे कि प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो चुका है और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। टेलीग्राम का कहना है कि उसने सैकड़ों संदिग्ध लिंक हटाए हैं और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी एक ऐप पर रोक लगाने से समस्या खत्म हो जाएगी? तकनीक बदलती रहेगी। प्लेटफॉर्म बदलते रहेंगे। लेकिन जब तक परीक्षा माफिया के पूरे नेटवर्क को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक युवाओं के सपनों पर मंडराता यह खतरा बना रहेगा।

NEET विवाद बना राजनीतिक मुद्दा बना

नीट विवाद अब परीक्षा केंद्रों से निकलकर देश की राजनीति में पहुंच चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोटा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर छात्रों और उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि परीक्षा माफिया के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्ष छात्रों की चिंता से ज्यादा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। कोटा में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया।

देश की परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय हो

राजनीति के इस शोर के बीच सरकार 21 जून को होने वाले री-एग्जाम को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने का दावा कर रही है। देशभर के परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों, जैमर, बायोमेट्रिक सत्यापन और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी तकनीकों के जरिए हर चरण पर निगरानी रखी जा रही है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है… क्या सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने से भरोसा वापस आ जाएगा? या फिर अब समय आ गया है कि देश की परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय की जाए?

सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल

क्या पेपर लीक को सिर्फ परीक्षा से जुड़ा अपराध मानना पर्याप्त है? या इसे युवाओं के भविष्य के खिलाफ संगठित अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए? नीट विवाद अब परीक्षा केंद्रों से निकलकर देश की राजनीति में भी पहुंच चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोटा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर छात्रों और उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। प्रियंका गांधी ने दावा किया कि नीट की तैयारी और कोचिंग पर छात्रों और उनके परिवारों से करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च कराए गए, जो देश के कुल शिक्षा बजट के लगभग बराबर है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लाखों परिवार अपनी जमा-पूंजी बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं, तब सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रही है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्ष छात्रों की चिंता से ज्यादा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। कोटा में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया।

संवेदनशील केंद्रों पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों की तैनाती

राजनीति के इस शोर के बीच सरकार 21 जून को होने वाले री-एग्जाम को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने का दावा कर रही है। देशभर के परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों, हाई-पावर जैमर, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी तकनीकों के जरिए परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण पर निगरानी रखी जा रही है। प्रश्नपत्रों को डिजिटल लॉक वाले विशेष कंटेनरों में भेजा जा रहा है और कई संवेदनशील केंद्रों पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवान तैनात किए गए हैं।

लेकिन, सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है… क्या सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने से छात्रों का भरोसा वापस आ जाएगा? या फिर अब समय आ गया है कि देश की परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय की जाए? नीट विवाद ने देश की कोचिंग व्यवस्था और शिक्षा के बढ़ते खर्च पर भी नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का दावा है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी अब करोड़ों रुपये के उद्योग में बदल चुकी है, जहां लाखों परिवार अपनी बचत, कर्ज और उम्मीदों के सहारे बच्चों के सपनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं।

सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, भरोसे का भी है

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सुरक्षा बढ़ा देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार, जवाबदेही तय करना और पेपर लीक के मामलों में त्वरित सजा सुनिश्चित करना उतना ही जरूरी है। कई विशेषज्ञ और संसदीय समितियां लंबे समय से सुझाव दे रही हैं कि नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं को साल में एक से अधिक बार आयोजित करने, डिजिटल एन्क्रिप्शन आधारित प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली अपनाने और परीक्षा संचालन के लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र बनाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

क्योंकि... सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है। सवाल उस भरोसे का है, जिस पर करोड़ों युवाओं का भविष्य टिका हुआ है। 21 जून का री-एग्जाम सिर्फ छात्रों की नहीं, बल्कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था की भी अग्निपरीक्षा है।

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