राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ को लेकर VHP का बड़ा बयान, 'श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा अनिवार्य'
आरएसएस की 10 से 12 जुलाई तक होने वाली बैठक पर सुरेंद्र जैन ने कहा कि यह संगठन का आंतरिक विषय है और आमतौर पर इसकी कार्यसूची सार्वजनिक नहीं की जाती। हालांकि, राम जन्मभूमि आंदोलन का महत्व और इसमें संघ की भूमिका को देखते हुए इस विषय पर चर्चा होना स्वाभाविक है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
गुरुग्राम, हरियाणा: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने शुक्रवार को कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद के लिए प्रशासनिक योग्यता के साथ-साथ भगवान श्रीराम के प्रति अटूट आस्था और समर्पण होना सबसे आवश्यक और अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के चयन के लिए गठित सर्च कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है और यह एक स्वागत योग्य पहल है।
सुरेंद्र जैन ने कहा, "राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के पद के लिए प्रशासनिक योग्यता के अलावा भगवान श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण सबसे जरूरी है। केवल वही व्यक्ति राम मंदिर के कार्यों का संचालन कर सकता है, जो प्रभु श्रीराम के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो। हमें उम्मीद है कि सर्च कमेटी इस पद के लिए योग्य और उपयुक्त व्यक्ति का चयन करेगी।" उन्होंने राम मंदिर दान गबन मामले पर कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट मिल चुकी है और अंतिम रिपोर्ट भी जल्द आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अंतिम रिपोर्ट आने से पहले किसी भी तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
"यह संगठन का आंतरिक मामला है, इसकी कार्यसूची सार्वजनिक नहीं की जाती"
आरएसएस की 10 से 12 जुलाई तक होने वाली बैठक पर सुरेंद्र जैन ने कहा कि यह संगठन का आंतरिक विषय है और आमतौर पर इसकी कार्यसूची सार्वजनिक नहीं की जाती। हालांकि, राम जन्मभूमि आंदोलन का महत्व और इसमें संघ की भूमिका को देखते हुए इस विषय पर चर्चा होना स्वाभाविक है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने चंपत राय और अन्य लोगों द्वारा वीआईपी पास जारी करने में इस्तेमाल की जाने वाली आईडी बंद किए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
वीआईपी पास में किसी प्रकार का वित्तीय लेन-देन नहीं हुआ- सुरेंद्र जैन
सुरेंद्र जैन ने स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि परिसर के लिए जारी किए गए वीआईपी पास में किसी प्रकार का वित्तीय लेन-देन नहीं हुआ। पास केवल उम्र, शारीरिक दिव्यांगता या अन्य विशेष परिस्थितियों के आधार पर जारी किए जाते थे। उन्होंने कहा कि पास जारी करने का अधिकार केवल निर्धारित अधिकारियों के पास होता है। चूंकि संबंधित अधिकारी अब उस पद पर नहीं हैं, इसलिए यह जिम्मेदारी स्वाभाविक रूप से किसी अन्य अधिकृत अधिकारी को सौंप दी गई है।