चंडीगढ़, पंजाब: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महान सिख योद्धा और धर्मरक्षक बाबा बंदा सिंह बहादुर के शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उनका जीवन साहस, त्याग, राष्ट्रभक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणादायक गाथा है। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अत्याचार और अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए लोगों के अधिकारों की रक्षा की तथा समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बाबा बंदा सिंह बहादुर का बलिदान भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है। उनका अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज भी युवाओं को देश सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक धर्म, सत्य और न्याय के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका संघर्ष और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
#WATCH | Chief Minister Nayab Singh Saini pays tribute to sikh miliatary leader and warrior Baba Banda Singh Bahadur on his martyrdom day.(Video source: DIPR) pic.twitter.com/CKkM9XXFF8
— ANI (@ANI) June 25, 2026
बाबा बंदा सिंह बहादुर: वीरता और बलिदान की मिसाल
बाबा बंदा सिंह बहादुर का इतिहास केवल युद्धों की कहानी नहीं है, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ एक अटूट संकल्प का प्रतीक है। उनका जन्म 1670 में जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में हुआ था। बचपन में उनका नाम लक्ष्मण देव था, जो बाद में 'माधो दास' बैरागी बन गए। उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ साल 1708 में आया, जब नांदेड़ में उनकी मुलाकात दसवें सिख गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से हुई। गुरु साहिब ने उन्हें 'अमृत' छकाकर 'बंदा सिंह बहादुर' का नाम दिया और उन्हें पंजाब में मुगलों के अत्याचार को खत्म करने के लिए भेजा।
प्रमुख ऐतिहासिक पड़ाव:
- 1708: गुरु गोबिंद सिंह जी से मुलाकात और पंजाब की ओर प्रस्थान।
- 1710 - सरहिंद की जीत: बाबा बंदा सिंह बहादुर ने वजीर खान को पराजित कर छोटे साहिबजादों की शहादत का बदला लिया और पहले सिख राज्य की नींव रखी। उन्होंने किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिया और गुरुओं के नाम के सिक्के जारी किए।
- 1716 - शहादत: दिल्ली में उन्हें और उनके सैकड़ों साथियों को मुगलों द्वारा अत्यंत क्रूरता के साथ शहीद कर दिया गया। उन्होंने हंसते-हंसते मौत को गले लगाया लेकिन अपना धर्म और स्वाभिमान नहीं छोड़ा।
आज उनके शहादत दिवस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, "बाबा बंदा सिंह बहादुर जी ने हमें सिखाया कि जब बात स्वाभिमान और धर्म की रक्षा की हो, तो संख्या बल मायने नहीं रखता, केवल संकल्प मायने रखता है।"

शिक्षा में बड़ा बदलाव: 8वीं के सिलेबस में शामिल हुआ सिख इतिहास
मुख्यमंत्री सैनी ने एक ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि हरियाणा सरकार ने कक्षा 8वीं के इतिहास के पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन वृत्तांत को शामिल करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह पता होना चाहिए कि आज जो आजादी हम देख रहे हैं, उसके पीछे कितना बड़ा संघर्ष और बलिदान रहा है।
8वीं कक्षा के छात्र पढ़ेंगे बाबा बंदा सिंह बहादुर के इतिहास
8वीं कक्षा के छात्र अब बाबा बंदा सिंह बहादुर की सरहिंद विजय, उनके प्रशासनिक सुधारों और उनकी शहादत के बारे में विस्तार से पढ़ सकेंगे। यह कदम न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाएगा बल्कि विद्यार्थियों में देशभक्ति और साहस की भावना भी भरेगा। बाबा बंदा सिंह बहादुर का शहादत दिवस हमें आत्म-चिंतन और समाज सेवा की प्रेरणा देता है।

बाबा बंदा सिंह बहादुर की शहादत को देश कभी भुला नहीं सकता
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा शिक्षा से लेकर रोजगार और धार्मिक यात्राओं तक लिए गए निर्णय यह दर्शाते हैं कि सरकार सर्वधर्म समभाव के सिद्धांत पर काम कर रही है। बाबा बंदा सिंह बहादुर का इतिहास अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरियाणा के हर घर में उनकी वीरता के किस्से गूंजेंगे। हम बाबा बंदा सिंह बहादुर की शहादत को कोटि-कोटि नमन करते हैं। उनके जैसे महान वीर योद्धा की शहादत को देश कभी भुला नहीं सकता और उनका जीवन सदैव हमें राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता रहेगा।
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