नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को याद करते हुए कहा कि यह भारत के लोकतंत्र की मजबूती और सहनशीलता की एक बड़ी परीक्षा थी। उन्होंने उन सभी लोगों के साहस को नमन किया जिन्होंने उस दौर में संवैधानिक मूल्यों और स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए आवाज उठाई।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए जयशंकर ने कहा, "आज आपातकाल की घोषणा की वर्षगांठ पर उस दौर को याद करते हैं, जिसने भारत के लोकतंत्र की मजबूती की कड़ी परीक्षा ली थी। साथ ही उन सभी लोगों के साहस को सलाम करते हैं, जिन्होंने संवैधानिक मूल्यों और स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए संघर्ष किया।"
लोकतंत्र की रक्षा करना हर दिन जरुरी है- एस. जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि आपातकाल की विरासत आज भी यह याद दिलाती है कि लोकतंत्र की रक्षा, उसे मजबूत करना और उसका सम्मान करना हर दिन जरूरी है। जयशंकर ने कहा, "उस दौर की विरासत हमें यह सशक्त संदेश देती है कि लोकतंत्र को हर दिन संरक्षित, सशक्त और सम्मानित किया जाना चाहिए।"
गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत "आंतरिक अशांति" का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की थी। देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक आपातकाल लागू रहा। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर इसे संविधान पर सीधा हमला बताया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
On the anniversary of the declaration of Emergency today, recall a period that severely tested the resilience of India’s democracy. Also salute the courage of all those who stood up in defence of constitutional values and freedoms.Its legacy remains a powerful reminder that…
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) June 25, 2026
'भारत के इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक आपातकाल'
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, "आज हम भारत के इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक, आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए डटकर खड़े रहने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित किया गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया तथा लोकतंत्र की आधारशिला माने जाने वाले संस्थानों पर भी आघात किया गया।"
Today, we pay homage to all those who steadfastly defended democratic values during one of the darkest chapters in India’s history, the Emergency.The Emergency was a direct assault on our Constitution. It witnessed the suspension of civil liberties, curbs on freedom of…
— Narendra Modi (@narendramodi) June 25, 2026
देश के नागरिकों ने दिया असाधारण साहस का परिचय- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी दौर में देश के अनगिनत नागरिकों ने असाधारण साहस का परिचय दिया और संविधान में निहित आदर्शों की रक्षा की। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "हमारा संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराते हैं। संविधान की भावना से प्रेरित होकर हम ऐसा भारत बनाएंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों के प्रति सदैव समर्पित रहेगा।"
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