करवा चौथ पर 15 घंटे बिना पानी के रहने से शरीर पर क्या पड़ता है असर? जानें निर्जला व्रत का पूरा विज्ञान

करवा चौथ पर 12 से 15 घंटे तक बिना भोजन और पानी के रहने से शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल और पानी के संतुलन में बदलाव हो सकता है। जानिए निर्जला व्रत के दौरान ग्लाइकोजन, वसा और डिहाइड्रेशन की भूमिका, किन महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए और व्रत सुरक्षित तरीके से कैसे खोलें।

By  Laxman October 27th 2026 05:15 PM -- Updated: October 27th 2026 04:06 PM

करवा चौथ 2026: करवा चौथ पर महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान लंबे समय तक भोजन और पानी न मिलने से शरीर की ऊर्जा, ब्लड शुगर और पानी का संतुलन प्रभावित हो सकता है। जानिए व्रत के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव, किन महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और व्रत खोलते समय क्या ध्यान रखना जरूरी है।

करवा चौथ के निर्जला व्रत में शरीर कैसे करता है काम?

करवा चौथ भारतीय परंपरा में आस्था और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं सुबह सरगी खाने के बाद पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं करतीं। चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है। हालांकि, 12 से 15 घंटे तक बिना पानी और भोजन के रहने का असर हर महिला के शरीर पर एक जैसा नहीं होता। यह उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और सुबह खाए गए भोजन पर निर्भर करता है।

शुरुआती 4 घंटे: सरगी से मिलती है ऊर्जा

सुबह सरगी में खाया गया भोजन पचने के बाद शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाला ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। वहीं, प्रोटीन, फाइबर और स्वस्थ वसा से भरपूर भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है।

सरगी में फल, दही, दूध, मेवे और अन्य पौष्टिक चीजें शामिल करने से दिन की शुरुआत बेहतर हो सकती है। इसके विपरीत, केवल मीठे या तले हुए खाद्य पदार्थ खाने से कुछ लोगों को जल्द भूख लग सकती है। हालांकि, ब्लड शुगर में बदलाव हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।

4 से 8 घंटे: शरीर इस्तेमाल करता है जमा ऊर्जा

भोजन से मिलने वाली ऊर्जा कम होने पर शरीर अपने संग्रहित ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाता है। लिवर में जमा ग्लाइकोजन टूटकर ग्लूकोज उपलब्ध कराने में मदद करता है, जिससे रक्त में शुगर का स्तर बनाए रखने में सहायता मिलती है।

इस दौरान कुछ महिलाओं को भूख, थकान, चिड़चिड़ापन या सिरदर्द महसूस हो सकता है। पानी न पीने के कारण प्यास और मुंह में सूखापन भी बढ़ सकता है।

8 से 12 घंटे: बढ़ सकता है थकान और कमजोरी का एहसास

उपवास लंबा होने पर शरीर ऊर्जा के लिए वसा का इस्तेमाल भी बढ़ाने लगता है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि आठ घंटे पूरे होते ही शरीर केवल चर्बी से ऊर्जा लेने लगता है। ऊर्जा के लिए ग्लूकोज, ग्लाइकोजन और वसा का उपयोग एक-दूसरे के साथ होता है और इसकी गति व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है।

यदि इस दौरान गर्मी हो, अधिक चलना-फिरना पड़े या घर के कामों में लगातार भागदौड़ हो, तो पसीने के जरिए पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी बढ़ सकती है। इससे थकान, सिरदर्द या चक्कर आने की आशंका रहती है।

12 घंटे के बाद: डिहाइड्रेशन का खतरा

लंबे समय तक पानी न पीने पर शरीर पानी बचाने की कोशिश करता है। किडनी पेशाब को अधिक गाढ़ा कर सकती है और पेशाब की मात्रा घट सकती है। गहरा पीला पेशाब, मुंह सूखना, अधिक प्यास और कमजोरी पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं।

अचानक खड़े होने पर चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छाना भी चिंता का संकेत है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

किन महिलाओं को निर्जला व्रत में सावधानी बरतनी चाहिए?

डायबिटीज, किडनी की बीमारी, हृदय संबंधी समस्याओं या पहले से कम ब्लड प्रेशर की परेशानी से जूझ रही महिलाओं को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। दवाओं और भोजन के समय में बदलाव स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को भी निर्जला उपवास से बचने या डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेने की जरूरत है। बुजुर्ग महिलाओं और पहले से कमजोर महसूस कर रही महिलाओं को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

व्रत के दौरान बेहोशी, भ्रम, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या लगातार चक्कर आने जैसे गंभीर लक्षण हों, तो व्रत जारी रखने की जिद न करें। जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

चांद देखकर व्रत खोलते समय रखें ध्यान

व्रत खोलने के बाद सबसे पहले धीरे-धीरे पानी पिएं। एकदम बहुत अधिक पानी पीने के बजाय छोटे-छोटे घूंट लेना बेहतर है। इसके बाद फल, दही या हल्का भोजन लिया जा सकता है। फिर अपनी भूख और सहनशीलता के अनुसार संतुलित भोजन करें।

व्रत के तुरंत बाद बहुत अधिक तला-भुना या भारी भोजन खाने से कुछ लोगों को पेट फूलने, गैस या बदहजमी की शिकायत हो सकती है। इसलिए भोजन की शुरुआत हल्के और आसानी से पचने वाले विकल्पों से करना बेहतर रहता है।

करवा चौथ आस्था और परंपरा से जुड़ा विशेष अवसर है, लेकिन सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। अपने शरीर के संकेतों को समझें और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।

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