हार्ट अटैक को आमतौर पर सीने में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी या बेचैनी जैसे लक्षणों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी कुछ समस्याओं के संकेत शरीर के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई दे सकते हैं। इनमें पैर भी शामिल हैं। पैरों में दर्द, सूजन, ठंडापन या घाव का देर से भरना जैसी समस्याएं खराब ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी हो सकती हैं।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि पैरों में दिखाई देने वाले ये लक्षण अपने आप में हार्ट अटैक के निश्चित संकेत नहीं हैं। इनके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। फिर भी अगर ये लक्षण लगातार बने हुए हैं या इनके साथ सांस फूलना, सीने में दबाव, असामान्य पसीना या अचानक कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

पैरों में दर्द और ऐंठन को न करें नजरअंदाज

अगर थोड़ी दूरी चलने या सामान्य शारीरिक गतिविधि के दौरान पैरों या पिंडलियों में दर्द, खिंचाव या ऐंठन होने लगे और कुछ देर आराम करने के बाद यह परेशानी कम हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसा Peripheral Artery Disease (PAD) से जुड़ा संभावित संकेत हो सकता है। PAD में पैरों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। यह स्थिति हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिमों के साथ जुड़ी हो सकती है।

इसलिए बार-बार होने वाले ऐसे दर्द की वजह जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

पैरों और टखनों में लगातार सूजन

पैरों या टखनों में बार-बार सूजन आना भी ऐसा लक्षण है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर जूते अचानक ज्यादा टाइट लगने लगें या पैरों में लगातार भारीपन महसूस हो, तो इसके पीछे शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होना भी एक कारण हो सकता है।

जब हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है और इसका असर पैरों तथा टखनों में सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है। हालांकि, पैरों की सूजन के पीछे किडनी, लिवर, नसों और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

गर्म मौसम में भी पैर ठंडे रहना

अगर सामान्य या गर्म मौसम में भी आपके पैर लगातार ठंडे महसूस होते हैं, तो इसका संबंध रक्त संचार से हो सकता है। धमनियों में संकुचन या रक्त प्रवाह कम होने की स्थिति में शरीर के कुछ हिस्सों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता।

पैरों का लगातार ठंडा रहना खराब ब्लड सर्कुलेशन का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल पैर ठंडे रहने से हार्ट डिजीज का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। शरीर का तापमान, नसों से जुड़ी समस्या और अन्य स्वास्थ्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

पैरों में घाव देर से भरना

अगर पैरों में लगी छोटी चोट या कट सामान्य समय में ठीक नहीं हो रहा है, तो इसकी वजह की जांच कराना जरूरी है। खराब रक्त प्रवाह की स्थिति में प्रभावित हिस्से तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति कम हो सकती है, जिससे घाव भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

ऐसी समस्या खासतौर पर उन लोगों में अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है जिन्हें पहले से रक्त वाहिकाओं या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या है। लंबे समय तक घाव न भरने की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पैरों में जलन, सुन्नपन या झुनझुनी

रात में पैरों में जलन, सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना भी कई लोगों में देखा जाता है। हालांकि, यह लक्षण कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है और केवल इसके आधार पर हृदय रोग का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

कुछ मामलों में इसे खराब ब्लड सर्कुलेशन और हृदय संबंधी समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है। लगातार या बढ़ती हुई परेशानी होने पर डॉक्टर से कारण की जांच कराना बेहतर है।

कब तुरंत मेडिकल मदद लें?

पैरों में इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने पर घबराने के बजाय इसकी वजह की जांच कराना महत्वपूर्ण है। लेकिन अगर पैरों से जुड़े लक्षणों के साथ सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में अचानक परेशानी, ठंडा पसीना, चक्कर, बेहोशी या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे आपात स्थिति मानकर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि पैरों के इन लक्षणों को सीधे हार्ट अटैक की भविष्यवाणी न माना जाए। ये संभावित संकेत हैं और इनके कई अन्य कारण हो सकते हैं। लगातार समस्या होने पर चिकित्सकीय जांच ही सही कारण पता करने का तरीका है।