SC/ST Act Case: यूट्यूबर अजीत भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Ajit Bharti Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामले में यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी से जुड़ा है।

By  Laxman September 24th 2026 03:10 PM

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर अजीत भारती को SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौरभ बनर्जी ने भारती की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उनके द्वारा दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

यह मामला आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायत के आधार पर अजीत भारती के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

निचली अदालत के फैसले को दी थी चुनौती

अजीत भारती ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से अग्रिम जमानत की मांग की गई थी, ताकि गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें राहत मिल सके।

गुरुवार को जस्टिस सौरभ बनर्जी की अदालत ने याचिका पर सुनवाई की और उसे खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि याचिका सुनने योग्य नहीं है।

फिलहाल अदालत के इस आदेश के बाद मामले में अजीत भारती को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं मिला है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने इस स्तर पर मामले में आरोपों की अंतिम सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।

चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा है मामला

यह पूरा विवाद नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित टिप्पणी से संबंधित है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की ओर से की गई शिकायत के बाद अजीत भारती के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

मामले में SC/ST एक्ट के प्रावधान लगाए गए हैं। कानून के तहत दर्ज ऐसे मामलों में अदालत आरोपों, उपलब्ध सामग्री और कानूनी प्रावधानों के आधार पर जमानत से जुड़े सवालों पर विचार करती है।

अजीत भारती की ओर से निचली अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार नहीं किया।

क्या है अग्रिम जमानत?

अग्रिम जमानत ऐसी कानूनी राहत है, जिसमें किसी व्यक्ति को संभावित गिरफ्तारी से पहले अदालत से संरक्षण मिल सकता है। यह नियमित जमानत से अलग होती है और अदालत मामले की परिस्थितियों तथा लागू कानूनी प्रावधानों को देखते हुए इस पर फैसला करती है।

इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अजीत भारती की याचिका खारिज कर दी है। इसका मतलब यह है कि इस याचिका के आधार पर उन्हें अग्रिम जमानत की राहत नहीं मिली। यह ध्यान रखना जरूरी है कि जमानत याचिका का खारिज होना किसी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने के बराबर नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।

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