केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से 3 हफ्ते में मांगा जवाब
केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी के भविष्य और सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत उसकी प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने तीन सप्ताह में जवाब मांगा है और 16 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी। मामले का संबंध 8.5 लाख से अधिक किताबों वाले इस ऐतिहासिक पुस्तकालय के स्थान और संरक्षण से है।
नई दिल्ली: देश की ऐतिहासिक केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी (Central Secretariat Library) को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत उचित जगह मिलने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए प्रस्तावित लाइब्रेरी व्यवस्था, उपलब्ध क्षेत्र और भवन के लेआउट से संबंधित जानकारी तीन सप्ताह के भीतर पेश करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने लाइब्रेरी के विशाल पुस्तक संग्रह को सुरक्षित रखने और प्रस्तावित नई व्यवस्था में पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने को लेकर कई सवाल उठाए।
अदालत ने मामले में सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रिया पद्मनाभन को भी नियुक्त किया है।
किताबों को रखने की जगह पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर लाइब्रेरी के मौजूदा पुस्तक संग्रह को लेकर चिंता जताई। अदालत के सामने यह जानकारी रखी गई कि दिल्ली के आरके पुरम में करीब दो लाख किताबें कार्टन में रखी हुई हैं और लंबे समय से उनका इस्तेमाल नहीं हुआ है।
अदालत ने यह जानना चाहा कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत प्रस्तावित नई लाइब्रेरी में इतने बड़े संग्रह को व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए पर्याप्त जगह होगी या नहीं।
केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक किताबें और दस्तावेज होने की जानकारी है। ऐसे में लाइब्रेरी को किसी नई जगह पर स्थानांतरित करने की स्थिति में पुस्तक संग्रह की सुरक्षा, भंडारण, वर्गीकरण और पाठकों के लिए उपलब्धता अहम मुद्दे बन गए हैं।
केंद्र से मांगा गया प्रस्तावित लेआउट
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी अदालत के सामने पेश हुईं। कोर्ट ने उनसे प्रस्तावित लाइब्रेरी परिसर से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी।
अदालत यह जानना चाहती है कि नई व्यवस्था में लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह निर्धारित की गई है और क्या वहां किताबों के विशाल संग्रह के साथ-साथ पाठकों और अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
कोर्ट ने प्रस्तावित भवन का वास्तविक लेआउट प्लान और लाइब्रेरी को दिए जाने वाले क्षेत्र से संबंधित जानकारी भी मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य सवाल यह है कि क्या नई योजना में लाइब्रेरी को सिर्फ एक औपचारिक सुविधा के रूप में जगह दी जाएगी या उसके मौजूदा स्वरूप और बड़े संग्रह को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा।
135 साल से अधिक पुराना है लाइब्रेरी का इतिहास
केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी का इतिहास करीब 135 साल से अधिक पुराना है। इसकी शुरुआत वर्ष 1891 में हुई थी। उस समय इसे इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता था।
1911 में ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने के बाद लाइब्रेरी को भी दिल्ली लाया गया। शुरुआती दौर में इसे सिविल लाइंस स्थित ओल्ड सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में स्थान मिला।
बाद में राजधानी के प्रशासनिक केंद्र के विस्तार के साथ लाइब्रेरी को रायसीना हिल क्षेत्र के आसपास स्थानांतरित किया गया। इसके बाद यह नॉर्थ ब्लॉक और फिर शास्त्री भवन पहुंची। वर्ष 1969 से केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी शास्त्री भवन में संचालित हो रही है।
इस लंबे इतिहास के कारण लाइब्रेरी को दिल्ली की महत्वपूर्ण संस्थागत पुस्तकालयों में गिना जाता है।
8.5 लाख से ज्यादा किताबों का संग्रह
केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी में उपलब्ध संग्रह इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। यहां 8.5 लाख से अधिक किताबें और दस्तावेज होने की जानकारी है।
यह संग्रह केवल सरकारी अधिकारियों के लिए उपयोगी नहीं है, बल्कि शोधकर्ताओं, छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इतने बड़े संग्रह को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना सामान्य शिफ्टिंग की प्रक्रिया नहीं है। किताबों के संरक्षण, तापमान और नमी नियंत्रण, रिकॉर्डिंग, कैटलॉगिंग और सुरक्षित भंडारण जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत होती है। इसके अलावा पाठकों को नियमित रूप से सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त रीडिंग स्पेस और आधुनिक लाइब्रेरी सुविधाएं भी जरूरी होती हैं।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से जुड़ा है मामला
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत केंद्रीय सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थागत सुविधाओं के लिए नए भवनों का विकास किया जा रहा है। इसी पुनर्विकास योजना के बीच केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर सवाल उठे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) लाइब्रेरी को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने से संबंधित विकल्पों पर काम कर रहे हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि प्रस्तावित व्यवस्था लाइब्रेरी के विशाल संग्रह और उसके नियमित उपयोग के लिए कितनी उपयुक्त होगी।
16 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार को प्रस्तावित लाइब्रेरी के क्षेत्रफल, भवन की योजना और उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित विवरण अदालत के सामने रखना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। उस सुनवाई में केंद्र की ओर से पेश की जाने वाली जानकारी के आधार पर अदालत आगे की दिशा तय कर सकती है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर है कि ऐतिहासिक लाइब्रेरी और उसके विशाल पुस्तक संग्रह के लिए भविष्य की व्यवस्था व्यावहारिक, पर्याप्त और सुरक्षित हो। अदालत के अगले आदेश से यह स्पष्ट हो सकता है कि केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी के स्थानांतरण और सेंट्रल विस्टा परियोजना के बीच आगे की प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।