DUSU Election 2026: NSUI की हार पर राहुल गांधी ने मांगा जवाब, दीपांशु शौकीन के टिकट विवाद पर भी चर्चा

DUSU Election 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में NSUI के चारों केंद्रीय पद हारने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन की समीक्षा शुरू की है। राहुल गांधी द्वारा कन्हैया कुमार से जवाब मांगने की रिपोर्ट के बीच दीपांशु शौकीन के टिकट विवाद पर भी चर्चा तेज है।

By  Laxman September 29th 2026 12:04 PM

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के चारों केंद्रीय पदों पर हार के बाद कांग्रेस के भीतर संगठन और उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन शुरू हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार से चुनावी प्रदर्शन और उम्मीदवारों के चयन को लेकर जवाब मांगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ से भी इस संबंध में चर्चा हुई।

DUSU चुनाव में NSUI के लिए सबसे ज्यादा चर्चा स्वतंत्र उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत को लेकर हुई। शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे थे और पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बाद स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे। उन्होंने उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोट हासिल किए, जबकि NSUI के आधिकारिक उम्मीदवार वीर चतरथ को सिर्फ 4,313 वोट मिले।

NSUI को चारों केंद्रीय पदों पर नहीं मिली जीत

DUSU के चार केंद्रीय पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—में इस बार NSUI एक भी सीट नहीं जीत सकी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद अपने नाम किए, जबकि उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की।

अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को हराया। डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि मीणा के खाते में 22,523 वोट आए। सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्षय राज सिंह ने जीत दर्ज की।

इस नतीजे के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने NSUI के संगठन, टिकट वितरण और बागी उम्मीदवारों से निपटने के तरीके पर चर्चा शुरू की।

राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार से क्या पूछा?

रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार से DUSU में NSUI के प्रदर्शन के कारणों पर चर्चा की।  रिपोर्ट में भी बताया गया कि चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व के स्तर पर बैठक हुई और टिकट वितरण तथा बागी उम्मीदवारों को लेकर जवाब मांगा गया।

बैठक के संदर्भ में सबसे बड़ा सवाल दीपांशु शौकीन के टिकट को लेकर सामने आया। शौकीन लंबे समय से छात्र राजनीति में सक्रिय थे और 2023 तथा 2024 में NSUI के लिए चुनाव प्रचार भी कर चुके थे। 2025 में उन्होंने संगठन का टिकट पाने की कोशिश की थी, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। इस साल भी टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।

दीपांशु शौकीन को टिकट क्यों नहीं मिला?

शौकीन के टिकट को लेकर कांग्रेस और उनसे जुड़े पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, NSUI के सूत्रों का कहना है कि संगठन ने शुरुआत में शौकीन को अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार बनाने की योजना बनाई थी। हालांकि, शौकीन उपाध्यक्ष पद से चुनाव लड़ना चाहते थे। इसके बाद संगठन ने उन्हें आधिकारिक पैनल से बाहर कर दिया।

वहीं, शौकीन ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा था कि NSUI ने उन्हें अध्यक्ष पद की पेशकश नहीं की थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमिताभ दुबे ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि शौकीन को अध्यक्ष पद का टिकट दिया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया और बाद में उपाध्यक्ष पद के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया।

इसलिए टिकट विवाद की पूरी तस्वीर में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे मौजूद हैं। उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि शौकीन और NSUI के बीच उम्मीदवार चयन को लेकर मतभेद हुआ था, लेकिन इसके पीछे की परिस्थितियों को लेकर दावे एक जैसे नहीं हैं।

शौकीन की जीत ने बढ़ाई चर्चा

स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर शौकीन की जीत ने पूरे चुनाव का समीकरण बदल दिया। उन्हें 30,615 वोट मिले, जबकि ABVP के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार ईशु मौर्य को 16,910 और NSUI के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले। शौकीन की जीत का अंतर 13,705 वोट रहा।

शौकीन 2023 से छात्र राजनीति में सक्रिय हैं और कॉलेज स्तर पर छात्र प्रतिनिधि की भूमिका भी निभा चुके हैं। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने छात्र आवास, हॉस्टल और कैंपस से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी।

एक और बागी उम्मीदवार से भी बढ़ी मुश्किल

NSUI के सामने केवल शौकीन का मामला नहीं था। संयुक्त सचिव पद के टिकट को लेकर भी विवाद सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक, विशेश यादव टिकट के दावेदार थे और बाद में उन्होंने समाजवादी छात्र सभा के समर्थन से चुनाव लड़ा। उन्हें 15,778 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे, जबकि NSUI के आधिकारिक उम्मीदवार गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले।

इस तरह NSUI के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर अलग-अलग स्तर पर बने मतभेद चुनाव के दौरान सार्वजनिक हो गए। चुनाव के बाद इन्हीं घटनाओं की समीक्षा कांग्रेस नेतृत्व के स्तर पर किए जाने की बात सामने आई है।

अब NSUI के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती

DUSU चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस के छात्र संगठन के सामने कैंपस स्तर पर संगठनात्मक रणनीति, उम्मीदवार चयन और असंतुष्ट नेताओं से संवाद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। चुनाव में NSUI के आधिकारिक उम्मीदवारों की तुलना में उसके पूर्व सदस्य और स्वतंत्र उम्मीदवार दीपांशु शौकीन का प्रदर्शन भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक-संगठनात्मक चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि, DUSU चुनाव के नतीजों को सीधे व्यापक युवा मतदाताओं की राय का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा। यह चुनाव दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच हुआ स्थानीय छात्र संघ चुनाव है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की समीक्षा और NSUI के भीतर आगे होने वाले संगठनात्मक फैसलों पर नजर बनी हुई है।

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