निशिकांत दुबे के बयान पर भड़के नवीन पटनायक, बोले- मानसिक इलाज की जरूरत...
भुवनेश्वर, ओडिशा: नवीन पटनायक ने सोमवार को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दिवंगत बीजू पटनायक पर की गई "आपत्तिजनक" टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और उनके मानसिक संतुलन पर सवाल उठाया। भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए नवीन पटनायक ने कहा कि वे दुबे के बयानों से हैरान हैं। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान बीजू पटनायक के निडर नेतृत्व को याद किया।
उन्होंने कहा, "मैं यह देखकर हैरान हूं कि सांसद निशिकांत दुबे ने बीजू बाबू के बारे में क्या-क्या बातें कही हैं। शायद उन्हें यह नहीं पता कि उस समय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दिल्ली में बीजू बाबू के दफ्तर के पास ही एक कार्यालय बनाया था, ताकि चीन के खिलाफ रणनीति बनाई जा सके। मैं उस समय बहुत छोटा था, लेकिन मुझे याद है कि बीजू बाबू कितने निडर थे और उन्होंने चीन के हमले का मुकाबला करने में कितना योगदान दिया। मुझे लगता है कि ऐसी बातें कहने के लिए निशिकांत दुबे को मानसिक डॉक्टर की जरूरत है।"
निशिकांत दुबे ने सभी आरोपों का किया खंडन
इस मुद्दे पर बीजू जनता दल (BJD) के सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट भी किया। हालांकि, निशिकांत दुबे ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने बीजू पटनायक पर कोई आरोप नहीं लगाया। उन्होंने कहा, "बीजू पटनायक एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और भाजपा उनका पूरा सम्मान करती है। जब कांग्रेस ने उनके साथ अन्याय किया, तब जनसंघ और भाजपा उनके साथ खड़े रहे। मैं नेहरू-गांधी परिवार के कार्यों पर एक श्रृंखला जारी कर रहा हूं। बताइए, मैंने अपने ट्वीट में बीजू बाबू पर कौन सा आरोप लगाया है? अगर किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं उन्हें समझाने की कोशिश करूंगा।"
महिला विधायक के घर हुए हमले की कड़ी निंदा की
इस बीच, नवीन पटनायक ने भुवनेश्वर में एक महिला विधायक के आवास पर हुए हमले की भी निंदा की। उन्होंने कहा, "कल भुवनेश्वर में एक महिला विधायक, श्रीमती मोहंती के घर पर हमला हुआ। यह न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है। उस समय घर में उनकी नौकरानी अकेली थी और उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। ऐसे घटनाक्रम से लोकतंत्र पर सवाल उठता है।"
विवाद 27 मार्च को निशिकांत दुबे के बयान से हुआ
यह विवाद 27 मार्च को निशिकांत दुबे के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जवाहर लाल नेहरू ने अमेरिका के पैसे और CIA एजेंटों की मदद से युद्ध लड़ा, जबकि उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अमेरिका सरकार, CIA और नेहरू के बीच कड़ी के रूप में काम कर रहे थे।
दुबे के इस बयान के बाद BJD नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा (Sasmit Patra) ने विरोध में संचार और आईटी संबंधी संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा, "मैं ऐसे व्यक्ति के अधीन काम जारी नहीं रख सकता, जो दिवंगत बीजू पटनायक जी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करता है।"