NTA में होगा बड़ा बदलाव, पेपर लीक रोकने के लिए सरकार तैयार करेगी नया परीक्षा तंत्र
NEET-UG विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पुनर्गठन की तैयारी तेज, आउटसोर्सिंग व्यवस्था से लेकर परीक्षा सुरक्षा तक कई बड़े सुधारों की योजना। शिक्षा मंत्रालय में भी लगातार प्रशासनिक फेरबदल जारी।
नई दिल्ली : देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों और नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के कामकाज में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाना है। इसी दिशा में अगले महीने एजेंसी के पुनर्गठन की योजना बनाई जा रही है, जिसमें प्रशासनिक ढांचे से लेकर परीक्षा संचालन के तरीकों तक कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
बीते कुछ महीनों में लगातार सामने आए परीक्षा विवादों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सरकार अब एक ऐसे मॉडल पर काम कर रही है, जिससे भविष्य में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं को न्यूनतम किया जा सके।
NTA के पुनर्गठन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का संगठनात्मक ढांचा नए सिरे से तैयार किया जाएगा। इसके तहत एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाएगी और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट बनाया जाएगा। साथ ही परीक्षा संचालन में अपनाई जाने वाली आउटसोर्सिंग व्यवस्था का भी पुनर्मूल्यांकन होगा।
बताया जा रहा है कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर नई व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। सरकार की प्राथमिकता ऐसा परीक्षा तंत्र विकसित करना है, जिसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही पहले से कहीं अधिक मजबूत हो।
'लीक-प्रूफ' परीक्षा प्रणाली पर फोकस
सरकार ऐसे तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर दे रही है, जिससे प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की संभावना लगभग समाप्त हो सके। इसके लिए डिजिटल सुरक्षा, एन्क्रिप्शन, डेटा मॉनिटरिंग और परीक्षा प्रक्रिया की रियल-टाइम निगरानी जैसे उपायों को नई प्रणाली का हिस्सा बनाया जा सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रमुख परीक्षाएं जैसे NEET, JEE और CUET हर वर्ष लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। इसलिए इन परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।
शिक्षा मंत्रालय में लगातार प्रशासनिक फेरबदल
परीक्षा विवादों के बीच शिक्षा मंत्रालय में भी बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। हाल ही में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनीत जोशी को उच्च शिक्षा सचिव के पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया गया है।
विनीत जोशी शिक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अध्यक्ष, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पहले महानिदेशक और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के कार्यवाहक अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान ही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) की शुरुआत हुई थी।
हालांकि CUET के शुरुआती वर्षों में तकनीकी और प्रबंधन संबंधी चुनौतियों को लेकर एजेंसी को आलोचना का सामना भी करना पड़ा। बाद में उन्हें मणिपुर का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था। अब नए प्रशासनिक फेरबदल के तहत उनकी जिम्मेदारी बदल दी गई है।
नई नियुक्तियों के साथ नई जिम्मेदारियां
सरकार ने नरेश कुमार गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव और टी.के. अनिल कुमार को स्कूली शिक्षा सचिव नियुक्त किया है। दोनों वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को अब शिक्षा मंत्रालय के महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार का मानना है कि नए नेतृत्व के माध्यम से परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया को गति मिलेगी और विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
CBSE में भी हुआ बदलाव
NTA के साथ-साथ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में भी हाल के दिनों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। 12वीं बोर्ड परीक्षा की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (On-Screen Marking) में आई तकनीकी गड़बड़ियों के बाद बोर्ड के शीर्ष स्तर पर भी प्रशासनिक परिवर्तन किए गए।
पूर्व अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता की जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई। इसके अलावा मंत्रालय के मीडिया एवं संचार विभाग में भी फेरबदल किया गया है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य संस्थागत जवाबदेही बढ़ाना और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना है।
NEET विवाद बना सुधारों की बड़ी वजह
नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक के बाद देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। कई राज्यों में छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
विपक्षी दल भी इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठा रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ परीक्षा सुधार और एजेंसियों की जवाबदेही पर भी बहस तेज हो गई है।
सरकार का कहना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली में स्थायी सुधार आवश्यक हैं।
पहले भी हो चुके हैं बड़े बदलाव
यह पहली बार नहीं है जब परीक्षा विवाद के बाद NTA के शीर्ष स्तर पर बदलाव किए गए हों। वर्ष 2024 में भी NEET और UGC-NET परीक्षा विवादों के बाद तत्कालीन महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को पद से हटाया गया था। उस समय भी सरकार ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा शुरू की थी।
अब एक बार फिर लगातार सामने आए विवादों के बाद व्यापक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार केवल अधिकारियों के तबादले तक सीमित रहने के बजाय पूरे परीक्षा तंत्र को आधुनिक, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जाएगा।
क्या बदलेगा आने वाले समय में?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित सुधार समयबद्ध तरीके से लागू होते हैं तो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ सकती है। आधुनिक तकनीक, मजबूत डिजिटल सुरक्षा, सीमित आउटसोर्सिंग और स्पष्ट जवाबदेही जैसी व्यवस्थाएं परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बना सकती हैं।
फिलहाल छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजर सरकार द्वारा घोषित किए जाने वाले नए सुधारों पर टिकी है। आने वाले महीनों में NTA के पुनर्गठन और नई परीक्षा प्रणाली की रूपरेखा स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि ये बदलाव परीक्षा व्यवस्था में कितना भरोसा वापस ला पाते हैं।