Omar Abdullah on Election Commission: ‘चुनाव से भरोसा उठ गया तो लोकतंत्र में क्या बचेगा?’ EC की रिपोर्ट पर बोले उमर

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी The Indian Express की रिपोर्ट पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और अगर लोगों का चुनावी प्रक्रिया से भरोसा उठ गया तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

By  Laxman September 23rd 2026 07:30 PM -- Updated: September 23rd 2026 07:02 PM

श्रीनगर: चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई The Indian Express की जांच रिपोर्ट के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था चुनाव पर आधारित है और अगर लोगों को चुनावों की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं रहेगा, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी पर भी असर पड़ सकता है।

श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में मीडिया से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस तरह की रिपोर्ट सामने आने के बाद सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। उनका कहना था कि अगर लोगों का चुनावों से भरोसा ही उठ जाए तो लोकतंत्र में फिर क्या बचता है?

Indian Express की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

The Indian Express की 23 सितंबर की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय पैनल में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच पिछले 10 महीनों में कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए।

रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, SIR से संबंधित प्रक्रियाओं तथा चुनावी डेटाबेस की पहुंच और प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को “अनधिकृत” और “अवैध” बताया तथा मतदाता डेटाबेस के संभावित केंद्रीकरण पर भी चिंता जताई। उन्होंने चुनावी सॉफ्टवेयर और उसके संचालन से जुड़े सवालों को भी उठाया था।

हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इस रिपोर्ट पर अलग पक्ष भी सामने आया है। आयोग ने आपत्ति नोट्स के अस्तित्व या उनके विवरण को खारिज नहीं किया, लेकिन कहा कि ऐसे नोट्स निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए।

‘पहले से मिल रही थीं Election Commission को लेकर शिकायतें’

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उनकी पार्टी और जम्मू-कश्मीर में पहले से कई चिंताएं रही हैं। उन्होंने खास तौर पर Delimitation का मुद्दा उठाया।

उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया को लेकर उनकी पार्टी ने पहले भी सवाल उठाए थे और उनका मानना था कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय भी उनकी ओर से आपत्तियां सामने रखी गई थीं।

हालांकि, परिसीमन को लेकर उमर के आरोप उनके राजनीतिक पक्ष का हिस्सा हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों का कोई न्यायिक निष्कर्ष नहीं बताया गया है।

राहुल गांधी के बयान का किया समर्थन

उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की चुनावी प्रक्रिया को लेकर की गई टिप्पणियों का भी समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति को वोट देने से रोका जाता है, जो मतदाता के रूप में अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहता है, तो यह गंभीर संवैधानिक चिंता का विषय है। उमर ने कहा कि वोट डालना नागरिक का अधिकार है और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों की उचित समीक्षा होनी चाहिए।

राहुल गांधी पिछले कुछ समय से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के बाद उन्होंने BJP, RSS और चुनाव आयोग पर ‘Vote Chori’ के आरोप लगाए हैं। ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

‘Corrective Action की जरूरत’

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को रिपोर्ट में सामने आए मुद्दों पर गौर करना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी संवैधानिक संस्था के कामकाज को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

उन्होंने The Indian Express की जांच रिपोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि लगातार और गहराई से की गई पत्रकारिता के जरिए संस्थागत कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आ सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अब केवल आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर यह देखना जरूरी है कि क्या सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

SIR को लेकर पहले से चल रही बहस

उमर का बयान ऐसे समय आया है जब Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के भीतर उठाई गई आपत्तियों में Form 6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस की पहुंच और कुछ राज्यों में मतदाता सूची से जुड़े फैसले शामिल हैं।

इस बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि आपत्ति नोट्स निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए गए।

ऐसे में उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही बहस में एक और राजनीतिक आवाज जोड़ दी है। फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि सामने आई आपत्तियों पर संस्थागत स्तर पर क्या स्पष्टीकरण या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं और क्या इससे चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे से जुड़े सवालों का समाधान हो पाता है।

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