Delhi-NCR में पटाखों पर पूरी तरह Ban नहीं, Supreme Court ने कहा- 24 घंटे आतिशबाजी की इजाजत भी नहीं

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि पूरे देश में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय धार्मिक भावनाओं, स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

By  Laxman September 30th 2026 01:31 PM

नई दिल्ली: दिवाली और अन्य त्योहारों से पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि पटाखों पर पूरे देश में पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का रास्ता नहीं अपनाया जाएगा, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि लोगों को 24 घंटे आतिशबाजी करने की अनुमति दे दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखने की बात कही। अदालत के मुताबिक ऐसा रास्ता तलाशना जरूरी है जिससे त्योहारों से जुड़ी धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी हो और पटाखों के कारण होने वाले प्रदूषण तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी नियंत्रित किया जा सके।

समय सीमा पर हो सकता है फैसला

अदालत ने संकेत दिया कि पटाखों के इस्तेमाल के लिए एक निर्धारित समय-सीमा तय करने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारों के दौरान आतिशबाजी पूरी तरह अनियंत्रित न हो।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की ओर से सुनवाई के दौरान कहा गया कि देशभर में पूर्ण प्रतिबंध से कुछ लोगों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि लंबे समय तक लगातार पटाखे चलाने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए कोर्ट के सामने चुनौती ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है जिसमें दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन कायम किया जा सके।

किन पटाखों की अनुमति होगी, इस पर भी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने केवल आतिशबाजी की अवधि ही नहीं, बल्कि इस्तेमाल किए जाने वाले पटाखों की प्रकृति पर भी ध्यान दिया है। अदालत यह देखना चाहती है कि किन पटाखों को अनुमति दी जा सकती है और किन उत्पादों पर रोक या नियंत्रण आवश्यक होगा।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में पटाखों से जुड़े मामलों में बोरियम वाले पटाखों और स्वीकृत ग्रीन क्रैकर्स से संबंधित प्रतिबंधों का उल्लेख कर चुका है। अदालत के 2025 के आदेश में बोरियम वाले पटाखों और NEERI से ग्रीन क्रैकर के तौर पर स्वीकृत नहीं किए गए पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी।

CPCB और केंद्र से मांगी गई अतिरिक्त जानकारी

सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB और केंद्र सरकार को कुछ तकनीकी पहलुओं पर अतिरिक्त परीक्षण करने के लिए समय दिया गया है। इसमें पटाखों में बोरियम की मौजूदगी की जांच और अलग-अलग पटाखों के संयुक्त फायर टेस्ट के जरिए उनके डेसिबल स्तर का आकलन शामिल है।

इन परीक्षणों से अदालत को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग प्रकार के पटाखों के इस्तेमाल को लेकर किस तरह के नियम बनाए जा सकते हैं।

दिल्ली-NCR में हर साल क्यों उठता है सवाल?

दिल्ली और आसपास के इलाकों में दिवाली के समय पटाखों का मुद्दा हर साल चर्चा में रहता है। आतिशबाजी से होने वाला धुआं और शोर पहले से मौजूद वायु एवं ध्वनि प्रदूषण की समस्या को बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, पटाखों को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़कर देखने वाले लोग पूर्ण प्रतिबंध का विरोध करते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा सुनवाई इसी व्यापक विवाद के बीच हो रही है। अदालत ने फिलहाल पूरे देश में पटाखों पर पूर्ण रोक लगाने के बजाय नियंत्रित इस्तेमाल और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित व्यवस्था की दिशा में विचार किया है।

मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। उस दौरान केंद्र सरकार और CPCB की ओर से किए जा रहे परीक्षणों तथा उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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