‘लोकतंत्र बचाओ नहीं, परिवार बचाओ मार्च’, शिवराज सिंह चौहान का INDIA ब्लॉक पर हमला
INDIA ब्लॉक की ओर से 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में प्रस्तावित ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ को लेकर बीजेपी ने विपक्ष पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अभियान को ‘परिवार बचाओ मार्च’ बताते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर राजनीतिक आरोप लगाए। वहीं विपक्ष ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर अपनी चिंताओं के तहत आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया है।
नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच बीजेपी और विपक्षी INDIA ब्लॉक के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। INDIA ब्लॉक ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ आयोजित करने का ऐलान किया है। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के इस अभियान पर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के प्रस्तावित कार्यक्रम को ‘परिवार बचाओ मार्च’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनावी प्रदर्शन पर आत्ममंथन करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं।
चौहान ने यह भी दावा किया कि विपक्ष आगामी चुनावों से पहले ही संभावित नतीजों को लेकर राजनीतिक माहौल तैयार कर रहा है। उन्होंने INDIA ब्लॉक के भीतर एकजुटता को लेकर भी सवाल उठाए और कई विपक्षी नेताओं की बैठक में मौजूदगी का मुद्दा उठाया।
INDIA ब्लॉक ने क्यों किया मार्च का ऐलान?
INDIA ब्लॉक की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में हुई थी। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष के अगले चरण के आंदोलन की जानकारी दी।
गठबंधन के मुताबिक, 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और SIR से जुड़े अपने सवाल जनता के सामने रखने की तैयारी कर रहा है।
विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर उनकी चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए। इन दावों पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है और आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप बताया है।
6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च
INDIA ब्लॉक के कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा 6 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इस दिन विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की योजना बना रहे हैं।
खड़गे के मुताबिक, यह मार्च चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर होगा। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं और उनके पद से हटने की मांग कर रहे हैं।
गठबंधन ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगने का भी फैसला किया है। विपक्षी नेता चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े अपने मुद्दे राष्ट्रपति के सामने रखने की तैयारी में हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा?
बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आंदोलन को लेकर कई राजनीतिक सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष का उद्देश्य वास्तव में लोकतंत्र से जुड़ा है तो उसे अपने गठबंधन की स्थिति और चुनावी प्रदर्शन पर भी चर्चा करनी चाहिए।
उन्होंने INDIA ब्लॉक के भीतर कथित मतभेदों का हवाला देते हुए पूछा कि कई प्रमुख विपक्षी नेता बैठक में क्यों नहीं थे। चौहान ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली से जुड़े विपक्षी नेताओं की अनुपस्थिति का जिक्र किया।
उनका यह बयान उस समय आया है जब INDIA ब्लॉक चुनाव आयोग के खिलाफ एक संयुक्त अभियान के जरिए विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहा है।
SIR बना राजनीतिक विवाद का केंद्र
पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में Special Intensive Revision यानी SIR प्रमुख मुद्दा है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बदलाव को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया का बचाव किया है और कहा है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने पहले संसद और सार्वजनिक मंचों पर सवाल उठाए और अब देशव्यापी अभियान की घोषणा की है।
आगे क्या होगा?
INDIA ब्लॉक का अभियान 2 अक्टूबर से शुरू होकर 8 अक्टूबर तक चलेगा। इसके दौरान जिला स्तर पर मार्च और प्रदर्शन प्रस्तावित हैं। 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों का चुनाव आयोग तक मार्च होगा।
इसके अलावा अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिश और अक्टूबर-नवंबर में कई बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना भी सामने आई है।
दूसरी तरफ, बीजेपी ने विपक्ष के अभियान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज कर दी है। शिवराज सिंह चौहान की टिप्पणी इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा है।
इस तरह SIR, मतदाता सूची, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे फिलहाल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्ष इन मुद्दों को लेकर अपने-अपने तर्क जनता के सामने रखने की तैयारी में हैं।