Supreme Court on Private Universities: प्राइवेट यूनिवर्सिटी के खर्च और फीस का देना होगा पूरा हिसाब, SC ने मांगी 5 साल की जानकारी
Supreme Court ने निजी विश्वविद्यालयों के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज को लेकर बड़ा आदेश दिया है। देशभर की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज से 5 साल के audited accounts, fees, fund utilisation, faculty और student grievance records समेत कई जानकारियां मांगी गई हैं।
नई दिल्ली: प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की फीस, वित्तीय प्रबंधन और संस्थानों में शिक्षा से जुड़े संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मुद्दे का दायरा बढ़ाते हुए देशभर की निजी यूनिवर्सिटीज से पिछले पांच वर्षों के वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफा कमाने वाली संस्था के तौर पर संचालित नहीं किया जा सकता। हालांकि, संस्थानों के सुचारू संचालन और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन के लिए उचित वित्तीय भंडार रखना संभव है। अदालत ने कहा कि शिक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों को शिक्षा से असंबंधित उद्देश्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए।
5 साल के Financial Records देने होंगे
सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों से पिछले पांच वर्षों के ऑडिटेड वित्तीय रिकॉर्ड मांगे हैं। इसमें संस्थान को कितनी राशि प्राप्त हुई, उसका कितना हिस्सा किस मद में खर्च हुआ, बची हुई राशि कितनी है और उसका निवेश कहां किया गया, जैसी जानकारी शामिल होगी।
अदालत ने शिक्षा से सीधे जुड़े नहीं होने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को किए गए भुगतानों का विवरण भी मांगा है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों के वित्तीय संसाधनों के इस्तेमाल की तस्वीर स्पष्ट करना है।
फीस और Admission Process का भी देना होगा ब्योरा
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों से छात्रों से ली जाने वाली फीस की पूरी जानकारी देने को कहा है। इसमें प्रवेश के समय ली जाने वाली फीस के अलावा पाठ्यक्रम के दौरान लिए जाने वाले Development Fee, Special Charges और अन्य शुल्क का विवरण शामिल है।
अदालत ने प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी जानकारी मांगी है। विश्वविद्यालयों को बताना होगा कि प्रवेश की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास है और विद्यार्थियों के चयन की प्रक्रिया कैसे संचालित होती है।
परीक्षा से जुड़ी व्यवस्था पर भी जानकारी मांगी गई है। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा आयोजित करने और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया शामिल है।
Government से मिली जमीन और दूसरी सुविधाओं की जानकारी
निजी विश्वविद्यालयों को यह भी बताना होगा कि उन्हें केंद्र या राज्य सरकार से जमीन, कानून में छूट या किसी अन्य विशेष सुविधा के रूप में क्या लाभ मिला है।
अदालत ने वित्तीय प्रबंधन में विश्वविद्यालय के प्रबंधन की भूमिका का विवरण भी मांगा है। इसके साथ ही शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, सेवा शर्तों और अन्य सुविधाओं से जुड़ी जानकारी देने को कहा गया है।
Teachers की Classes का भी हिसाब
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की कार्यप्रणाली से संबंधित विस्तृत जानकारी भी मांगी है। विश्वविद्यालयों को बताना होगा कि शिक्षकों को कक्षाएं आवंटित करने का अधिकार किस अधिकारी के पास है।
इसके अलावा जनवरी 2025 से अब तक प्रत्येक शिक्षक को कितनी कक्षाएं आवंटित की गईं और उन्होंने वास्तव में कितनी कक्षाएं लीं, इसका विवरण भी मांगा गया है। यदि किसी शिक्षक ने निर्धारित कक्षाएं नहीं लीं तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई, इसकी जानकारी भी देनी होगी।
Students की Complaints और Grievance System की भी जांच
अदालत ने छात्रों की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पर भी जानकारी मांगी है। विश्वविद्यालयों को अपनी Grievance Redressal Committees की संरचना और अधिकार क्षेत्र बताना होगा।
इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों में कितनी शिकायतें मिलीं, शिकायतों की प्रकृति क्या थी, उन पर क्या कार्रवाई हुई और उनके निपटारे में कितना समय लगा, इसका रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होगा।
चिकित्सा शिक्षा संचालित करने वाले विश्वविद्यालयों से जुड़े अस्पतालों की जानकारी भी मांगी गई है। विश्वविद्यालय और संबंधित अस्पताल के बीच संबंध तथा अस्पताल की भूमिका का विवरण भी अदालत के समक्ष रखना होगा।
केंद्र और राज्यों को भी दाखिल करना होगा Affidavit
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जानकारी हासिल करने के बाद अपने मुख्य सचिवों के माध्यम से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह प्रक्रिया 17 सितंबर 2026 के आदेश से छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।
यह मामला मूल रूप से नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़े एक छात्र की शिकायत से शुरू हुआ था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे व्यापक सार्वजनिक महत्व का मानते हुए देशभर की निजी यूनिवर्सिटीज की व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की जानकारी मांगने का दायरा बढ़ा दिया।