तरुण तेजपाल को रेप केस में 10 साल की सजा, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा बरी होने का फैसला

2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में हाईकोर्ट ने गोवा सेशंस कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए तरुण तेजपाल को दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

By  Laxman August 6th 2026 03:46 PM

नई दिल्ली/पणजी: तहलका मैगजीन के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उन्हें दोषी करार देने के बाद 10 वर्ष के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को निरस्त कर दिया।

यह मामला पिछले एक दशक से देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, न्यायिक प्रक्रिया और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों पर बहस तेज हो गई है।

गोवा सरकार की अपील पर पलटा फैसला

इस मामले में गोवा सरकार ने सेशंस कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। राज्य सरकार का तर्क था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया और शिकायतकर्ता के बयान को उचित महत्व नहीं दिया।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद सेशंस कोर्ट के फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी माना और अब उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोपों के अनुसार, गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहयोगी के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया था। महिला पत्रकार ने बाद में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू हुई।

30 नवंबर 2013 को तरुण तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए गए, जिनमें रेप, यौन उत्पीड़न और गलत तरीके से बंधक बनाने जैसे आरोप शामिल थे।

लंबी चली कानूनी प्रक्रिया

मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली। 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट ने सबूतों के आधार पर तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। हालांकि, इस फैसले को लेकर काफी विवाद हुआ और गोवा सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने मामले की दोबारा समीक्षा की और पाया कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था। इसके बाद अदालत ने दोषसिद्धि का आदेश दिया और अब सजा भी सुना दी।

सरेंडर के लिए मांगा समय

सजा सुनाए जाने के बाद तरुण तेजपाल ने अदालत से आत्मसमर्पण (सरेंडर) के लिए आठ सप्ताह का समय देने की मांग की। उन्होंने अदालत के सामने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ आगे अपील करना चाहते हैं।

उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि वे राजनीतिक साजिश का शिकार हुए हैं और न्यायिक प्रक्रिया में अपने अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे।

दोषी ठहराए जाने के बाद क्या बोले तेजपाल?

अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि उनकी उम्र 62 वर्ष है और वे स्वयं को इस पूरे मामले में पीड़ित मानते हैं। उन्होंने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि उनके परिवार की जिम्मेदारियां हैं और वे इस फैसले को उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प अपनाएंगे।

महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर फिर चर्चा

इस फैसले के बाद कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, यौन उत्पीड़न के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ितों के अधिकारों पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों का सही मूल्यांकन और समयबद्ध न्याय बेहद महत्वपूर्ण है।

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या तरुण तेजपाल उच्चतम न्यायालय में इस फैसले को चुनौती देते हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

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