'असली शिवसैनिक मेरे साथ हैं', बागी सांसदों पर उद्धव ठाकरे का बड़ा हमला

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अनिल देसाई ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने इन सांसदों को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर भरोसा करके चुना था। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र की जनता उद्धव जी को अच्छी तरह जानती है। कोविड-19 महामारी के दौरान उनका नेतृत्व, डॉक्टरों का समर्थन और बाढ़ तथा फसल नुकसान के समय किसानों के साथ खड़े रहने की उनकी छवि आज भी लोगों के दिलों में है। जनता ने उद्धव जी के कहने पर इन सांसदों को वोट दिया था।"

By  Preeti Kamal June 27th 2026 01:30 PM -- Updated: June 27th 2026 12:57 PM

यवतमाल, महाराष्ट्र: शिवसेना (यूबीटी) में हालिया बगावत के बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को कहा कि "असली शिवसैनिक आज भी मेरे साथ हैं।" उन्होंने हाल ही में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए बागी सांसदों पर भी तीखा हमला बोला।

यवतमाल दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, "असली शिवसैनिक मेरे साथ हैं। बाकी लोगों का व्यवहार पूरा महाराष्ट्र देख रहा है। मुझे इस बात पर शर्म आती है कि वे इतने लंबे समय तक हमारे साथ रहे।" यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख उन छह सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया।

उद्धव ठाकरे ने बागी सांसदों पर साधा निशाना

बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे सिर्फ उनके प्रचार और जनता के भरोसे के कारण लोकसभा चुनाव जीत पाए थे। उन्होंने कहा, "ये सांसद सिर्फ मेरे कहने पर चुने गए थे। अब ये कहते हैं कि अपने क्षेत्र का दौरा करने की कोई जरूरत नहीं है, जबकि इन्हें जिताने के लिए मैंने खुद उनके क्षेत्रों में जाकर प्रचार किया था। आज किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी नहीं मिल रही, लेकिन इन निकम्मे सांसदों को अपनी कुर्सी की गारंटी चाहिए।"

भ्रष्ट और बिकाऊ सांसदों ने महाराष्ट्र का नाम बदनाम किया- उद्धव ठाकरे

उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को हुई पार्टी की बैठक का भी जिक्र करते हुए कहा कि उसके नतीजे आने वाले दिनों में सामने आएंगे। इस दौरान शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता अनिल देसाई और अरविंद सावंत भी उनके साथ मौजूद रहे।

मीडिया से बातचीत में अरविंद सावंत ने बागी सांसदों के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, "लोकसभा में हमारे नौ सांसद और राज्यसभा में दो सांसद थे। आखिर ऐसी कौन-सी परेशानी थी कि पार्टी छोड़नी पड़ी? पार्टी ने उनके साथ कोई अन्याय नहीं किया। मीडिया ने भी दिखाया कि उन्होंने सांसद निधि का सही इस्तेमाल नहीं किया। वे बिकाऊ और भ्रष्ट हैं। उन्होंने महाराष्ट्र का नाम बदनाम किया है। देशभर में इस तरह का राजनीतिक भ्रष्टाचार भाजपा ने शुरू किया है।"

बागी सांसदों ने जनता का भरोसा तोड़ा

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद अनिल देसाई ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने इन सांसदों को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर भरोसा करके चुना था। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र की जनता उद्धव जी को अच्छी तरह जानती है। कोविड-19 महामारी के दौरान उनका नेतृत्व, डॉक्टरों का समर्थन और बाढ़ तथा फसल नुकसान के समय किसानों के साथ खड़े रहने की उनकी छवि आज भी लोगों के दिलों में है। जनता ने उद्धव जी के कहने पर इन सांसदों को वोट दिया था।"

विरोधी पार्टी का नाम लिए बगैर उद्धव ठाकरे ने दिया संदेश

अनिल देसाई ने कहा कि पार्टी अब जनता के बीच जाकर उन्हें बताएगी कि यह राजनीतिक विश्वासघात कैसे हुआ। उन्होंने कहा, "हम उन मतदाताओं के बीच जाएंगे जिन्होंने उद्धव जी पर भरोसा कर इन सांसदों को चुना था। हम उन्हें बताएंगे कि यह विश्वासघात कैसे हुआ और संविधान ने आम मतदाता, किसान और मजदूर को अपने प्रतिनिधि चुनने की जो ताकत दी है, उसकी याद दिलाएंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को जनता का विश्वास जीतकर मजबूत होना चाहिए, न कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को तोड़कर अपनी ताकत बढ़ानी चाहिए।

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