उमर खालिद-शरजील इमाम को दिल्ली HC से राहत नहीं, जमानत याचिका खारिज

2020 दिल्ली दंगा मामले की कथित बड़ी साजिश से जुड़े केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश के संदर्भ में आया है।

By  Laxman September 30th 2026 12:02 PM

नई दिल्ली: 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले से जुड़ी कथित बड़ी साजिश में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों ने कड़कड़डूमा कोर्ट के 4 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज करते समय सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के फैसले का हवाला दिया था।

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों की जमानत का विरोध किया। पुलिस की ओर से दलील दी गई कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के मद्देनजर उनकी नई जमानत याचिका फिलहाल विचार योग्य नहीं है। पुलिस ने दोनों को कथित साजिश में अहम भूमिका निभाने वाला बताया और उनकी हिरासत जारी रखने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या असर?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को उमर खालिद और शरजील इमाम को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया था। उसी मामले में कुछ अन्य आरोपियों को जमानत दी गई थी। शीर्ष अदालत ने दोनों के मामले में अभियोजन की ओर से पेश सामग्री को उस स्तर पर प्रथमदृष्टया विचार के लिए पर्याप्त माना था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दोनों आरोपियों के लिए यह रास्ता खुला रखा गया था कि संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद या आदेश की तारीख से एक वर्ष पूरा होने की स्थिति में, परिस्थितियों के अनुसार जमानत के लिए दोबारा आवेदन किया जा सकता है।

जुलाई में ट्रायल कोर्ट ने भी नहीं दी थी राहत

इससे पहले 4 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसी कोई नई परिस्थिति सामने नहीं आई है जिसके आधार पर तत्काल राहत दी जा सके।

इसके बाद दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। जुलाई में हाईकोर्ट ने उमर खालिद की नई जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब भी मांगा था। शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका भी इसी मामले में हाईकोर्ट के समक्ष लंबित थी।

दिल्ली दंगा मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हिंसा के पीछे एक बड़ी साजिश थी और इसी आरोप के तहत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। मामले में UAPA समेत कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी के अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया था कि उस स्तर पर अदालत का काम मुकदमे के दौरान सबूतों का अंतिम मूल्यांकन करना नहीं, बल्कि यह देखना है कि अभियोजन की सामग्री प्रथमदृष्टया आरोपों को समर्थन देती है या नहीं। अदालत की ये टिप्पणियां जमानत के चरण तक सीमित थीं और इन्हें ट्रायल के अंतिम नतीजे के रूप में नहीं माना जाना है।

शरजील इमाम को हाल में मिली थी अंतरिम जमानत

गौरतलब है कि सितंबर 2026 में शरजील इमाम को एक अलग सीमित अवधि की अंतरिम राहत मिली थी। दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें अपने दो चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक सात दिन की अंतरिम जमानत दी थी। इस राहत के साथ अदालत ने कई शर्तें भी लगाई थीं।

हालांकि, यह अंतरिम जमानत नियमित जमानत से अलग थी। दिल्ली दंगा मामले में नियमित जमानत का सवाल अलग से अदालतों के सामने विचाराधीन रहा है।

फिलहाल हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद उमर खालिद और शरजील इमाम को इस मामले में नियमित जमानत नहीं मिली है। आगे की कानूनी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश और मामले की प्रगति के आधार पर तय होगी।

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