पंजाब में एजीएच आतंकी साजिश मामले में NIA की विशेष अदालत का बड़ा फैसला, 3 दोषियों को सजा
चंडीगढ़, पंजाब: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) से जुड़े वर्ष 2018 के आतंकी साजिश मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह मामला पंजाब के जालंधर स्थित एक शैक्षणिक संस्थान के हॉस्टल कमरे से हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद होने से जुड़ा था।
आधिकारिक बयान के अनुसार, पंजाब के मोहाली स्थित NIA की विशेष अदालत ने जाहिद गुलजार, यासिर रफीक भट और मोहम्मद इदरीस शाह को इस मामले में दोषी करार दिया था। अदालत ने 4 जून को इन तीनों को सजा सुनाई। तीनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम [UAPA], शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 5 वर्ष, 7 वर्ष और 10 वर्ष के कठोर कारावास (RI) की सजा दी गई है। अधिकतम सजा 10 वर्ष के कठोर कारावास की है।
नवंबर 2028 में NIA को सौंपी थी मामले की जांच
मामले में एक अन्य आरोपी सुहैल अहमद भट को अदालत ने बरी कर दिया है। यह मामला अक्टूबर 2018 में पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था और नवंबर 2018 में भारत सरकार के निर्देश पर इसकी जांच NIA को सौंप दी गई थी।
मामले की शुरुआत तब हुई जब पंजाब पुलिस ने जालंधर के शाहपुर स्थित सीटी इंस्टीट्यूट के हॉस्टल में तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान आरोपियों के कमरे से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। बरामदगी में एक AK-56 राइफल, मैगजीन, जिंदा कारतूस और विस्फोटक सामग्री शामिल थी।
भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ाने की साज़िश में शामिल थे आरोपी
NIA की जांच में सामने आया कि आरोपी भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए आपराधिक साजिश में शामिल थे। जांच के दौरान NIA ने मौखिक, दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक और फोरेंसिक साक्ष्यों के साथ-साथ गवाहों के बयानों का भी गहन विश्लेषण किया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 64 गवाहों को पेश किया। यह फैसला पंजाब पुलिस और NIA के संयुक्त प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है।