ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी पर अकाल तख्त साहिब में बांटे गए जरनैल सिंह भिंडरांवाले के पोस्टर

By  Preeti Kamal June 6th 2026 10:06 AM

अमृतसर, पंजाब: ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी के अवसर पर अमृतसर स्थित अकाल तख्त साहिब में जरनैल सिंह भिंडरांवाले के पोस्टर वितरित किए गए। जरनैल सिंह भिंडरांवाले कट्टरपंथी सिख संगठन दमदमी टकसाल के प्रमुख थे। जून 1984 में स्वर्ण मंदिर परिसर से उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान वह अपने हथियारबंद समर्थकों के साथ मारे गए थे।

शनिवार को उनकी पुण्यतिथि पर अकाल तख्त साहिब में मौजूद लोगों ने भिंडरांवाले को याद किया। इस दौरान खालिस्तान समर्थक नारे भी लगाए गए। पंजाब पुलिस ने स्वर्ण मंदिर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त विशालजीत सिंह ने कहा, "6 जून को ध्यान में रखते हुए हमने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। किसी भी अवैध गतिविधि को रोकने के लिए पूरे शहर में जांच चौकियां स्थापित की गई हैं। पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और स्वर्ण मंदिर जाने वाले सभी मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए हैं।"

4,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई

इससे पहले पुलिस के विशेष महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) प्रवीण कुमार सिन्हा ने अमृतसर का दौरा कर सुरक्षा बलों की तैनाती की समीक्षा की थी। उन्होंने पुष्टि की कि शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए लगभग 4,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। 

पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रवीण कुमार सिन्हा ने कहा, "6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी है। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम और आयोजन होते हैं, जिससे सुरक्षा की दृष्टि से स्थिति संवेदनशील हो जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए पंजाब, विशेषकर अमृतसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था स्थापित की गई है।"

अलग सिख राज्य की मांग से जुड़े उग्रवादियों पर हुई थी कार्रवाई

6 जून 1984 वह दिन था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत स्वर्ण मंदिर परिसर में प्रवेश किया था। इस अभियान का उद्देश्य पंजाब में जरनैल सिंह भिंडरांवाले के नेतृत्व में चल रही अलग सिख राज्य की मांग से जुड़े उग्रवादियों पर कार्रवाई करना था। रिपोर्टों के अनुसार, भिंडरांवाले ने स्वर्ण मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में हथियार जमा कर रखे थे।

इस सैन्य अभियान की व्यापक आलोचना हुई थी। इसके कुछ महीनों बाद, 31 अक्टूबर 1984 को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों, बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने हत्या कर दी थी।

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