Punjab Election 2027: वारिस पंजाब दे ने BJP से गठबंधन की अटकलों पर लगाया ब्रेक, कहा- ‘सत्ता नहीं, संगत की आवाज प्राथमिकता’

Punjab Election 2027 से पहले वारिस पंजाब दे ने BJP के साथ गठबंधन की अटकलों पर स्थिति स्पष्ट की है। मनप्रीत अयाली ने कहा कि फिलहाल गठबंधन का कोई सवाल नहीं है और भविष्य में किसी भी राजनीतिक समझौते पर ‘संगत’ की राय अहम होगी।

By  Laxman September 18th 2026 07:50 PM -- Updated: September 18th 2026 07:18 PM

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की सियासत में क्षेत्रीय और पंथिक राजनीति को लेकर हलचल तेज है। अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले वारिस पंजाब दे से जुड़े नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है। अयाली ने कहा कि पार्टी किसी भी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर फैसला अभी नहीं कर रही है और भविष्य में ऐसा कोई निर्णय हुआ तो उसमें ‘संगत’ की राय अहम होगी।

मनप्रीत अयाली के मुताबिक, मौजूदा समय में BJP के साथ चुनावी समझौते का कोई सवाल नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि वारिस पंजाब दे का समर्थन आधार मुख्य रूप से ग्रामीण पंजाब और युवाओं में है और पार्टी ऐसे किसी फैसले से बचना चाहती है, जिससे उसके समर्थकों के बीच असहमति पैदा हो।

BJP के साथ गठबंधन पर क्या बोले अयाली?

अयाली ने कहा कि यदि वारिस पंजाब दे और BJP के बीच चुनावी समझौता होता है तो ग्रामीण इलाकों में पार्टी को राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। उनके मुताबिक, ग्रामीण पंजाब में BJP को लेकर मतदाताओं के एक हिस्से में अभी भी असहमति है।

उन्होंने किसानों से जुड़े मुद्दों और सिख समुदाय से संबंधित विभिन्न विषयों का हवाला देते हुए कहा कि इन मुद्दों को लेकर BJP के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसे की समस्या बनी हुई है। ये अयाली के राजनीतिक आकलन और दावे हैं।

अयाली ने यह भी कहा कि पार्टी की राजनीतिक दिशा उसके समर्थक वर्ग और ‘संगत’ की भावनाओं को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। उनका कहना है कि संगठन के लिए ग्रामीण युवा एक महत्वपूर्ण आधार हैं।

‘पार्टी का मुख्य एजेंडा सत्ता हासिल करना नहीं’

वारिस पंजाब दे की चुनावी रणनीति को लेकर अयाली ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं है। उनके मुताबिक, संगठन सिख संगत की आवाज, उनकी भावनाओं और विचारधारा को राजनीतिक स्तर पर उठाने तथा पंजाब की तरक्की के लिए काम करने को प्राथमिकता देता है।

हालिया बयानों में भी अयाली ने कहा है कि संगठन का उद्देश्य किसी पद या सत्ता के लिए समझौता करना नहीं, बल्कि पंजाब और पंथ से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखना है। उन्होंने एक क्षेत्रीय राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

जुलाई में दिए एक इंटरव्यू में अयाली ने 2027 के लिए पंथिक मुद्दों और हिंदू-सिख एकता को पार्टी के प्रमुख एजेंडे में बताया था। उन्होंने आर्थिक विकास और पंजाब को सभी समुदायों के लिए सुरक्षित बनाने की बात भी कही थी।

गठबंधन का फैसला कौन करेगा?

अयाली के बयान के मुताबिक, यदि चुनाव से पहले या चुनाव के बाद किसी मुख्यधारा की पार्टी के साथ गठबंधन की स्थिति बनती है, तो अंतिम फैसला पार्टी की ‘संगत’ की राय के आधार पर किया जाएगा।

इसका मतलब यह है कि वारिस पंजाब दे फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक दल के साथ औपचारिक चुनावी समझौते की घोषणा करने की स्थिति में नहीं है। संगठन ने अपने राजनीतिक फैसलों में समर्थकों और पंथिक विचारधारा को प्राथमिक आधार बनाए रखने का संकेत दिया है।

वहीं BJP की ओर से पंजाब चुनाव को लेकर हालिया स्थिति अलग है। BJP के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया ने अगस्त में कहा था कि पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और वारिस पंजाब दे समेत अन्य पंथिक समूहों के साथ गठबंधन से इनकार किया था।

2027 के चुनाव में वारिस पंजाब दे की तैयारी

वारिस पंजाब दे ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। अगस्त में पार्टी ने फरीदकोट में रैली के जरिए 2027 के लिए अभियान की शुरुआत की थी। संगठन की ओर से चुनावी मैदान में उम्मीदवार उतारने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

जून 2026 में डाखा के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के संगठन से जुड़ने के बाद वारिस पंजाब दे को पंजाब की मुख्यधारा की चुनावी राजनीति में एक निर्वाचित विधायक का अनुभव भी मिला।

ऐसे में 2027 का चुनाव केवल बड़े दलों के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं रहेगा। वारिस पंजाब दे जैसे क्षेत्रीय और पंथिक संगठनों की भूमिका भी चुनावी समीकरण का हिस्सा बन सकती है। हालांकि, पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, किन दलों से भविष्य में तालमेल करेगी और उसका अंतिम चुनावी एजेंडा क्या होगा, इस पर आगे के फैसले महत्वपूर्ण होंगे।

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