अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में ड्यूटी पर तैनात पंजाब पुलिस के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद एक संगठन ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है, हालांकि पुलिस ने फिलहाल इसे आतंकी हमला मानने की बात से इनकार किया है। घटना के बाद पंजाब में कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

अमृतसर में ड्यूटी के दौरान ASI को मारी गई गोली

जानकारी के मुताबिक, हरजीत सिंह अमृतसर के थाना गेट हकीमा के तहत आने वाले इलाके में पुलिस कमिश्नरेट की PCR ड्यूटी पर तैनात थे। वह भगतांवाला अनाज मंडी के पास ड्यूटी कर रहे थे, तभी मोटरसाइकिल पर आए दो युवकों ने कथित तौर पर उन पर गोलियां चला दीं।

हमले में हरजीत सिंह को तीन गोलियां लगीं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हरजीत सिंह मूल रूप से तरनतारन के रहने वाले थे।

पुलिस ने घटना के बाद इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। हमलावरों की पहचान और हत्या के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

Tehreek-e-Taliban Hindustan के दावे से बढ़ा मामला

हत्याकांड के बाद Tehreek-e-Taliban Hindustan (TTH) नाम के संगठन ने कथित तौर पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। इसी संगठन का नाम इससे पहले अमृतसर के अजनाला इलाके में एक पुलिस अधिकारी पर हुए हमले के बाद भी सामने आया था। हालांकि इस संगठन की वास्तविक प्रकृति और दावे की विश्वसनीयता को लेकर जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं।

हरजीत सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने फिलहाल आतंकी हमले के एंगल को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में संगठन के दावे और पुलिस जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। हत्या के पीछे वास्तविक कारण और हमलावरों की पहचान जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

CM भगवंत मान ने परिवार के लिए मुआवजे का ऐलान किया

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ASI हरजीत सिंह की मौत पर शोक व्यक्त किया है। सरकार की ओर से परिवार के लिए ₹1 करोड़ की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा HDFC बैंक की ओर से परिवार को ₹1 करोड़ का बीमा भुगतान मिलने की जानकारी सामने आई है।

पंजाब पुलिस ने भी हरजीत सिंह के बलिदान पर शोक जताते हुए कहा कि विभाग इस मुश्किल समय में उनके परिवार के साथ खड़ा है। उन्हें पूरे पुलिस सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की बात कही गई है।

BJP और अकाली दल ने सरकार से पूछे सवाल

घटना के बाद पंजाब की राजनीति में भी कानून-व्यवस्था का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया। भाजपा नेता तरुण चुघ ने ASI की हत्या पर दुख जताते हुए पंजाब में पुलिसकर्मियों और पुलिस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।

चुघ ने दावा किया कि राज्य में पुलिस थानों और अन्य पुलिस प्रतिष्ठानों को पहले भी निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमले की घटनाएं सरकार के सामने सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती रखती हैं।

भाजपा नेता ने पंजाब में नशा, रंगदारी और गैंगस्टर गतिविधियों का भी मुद्दा उठाया और आम आदमी पार्टी सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल किए। ये राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इन दावों पर अलग-अलग मामलों में जवाब दिए जाते रहे हैं।

वहीं, अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि राज्य में कई ASI पर हमले हुए हैं और पूछा कि यदि पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा को लेकर क्या स्थिति होगी।

अमृतसर में पुलिसकर्मियों पर हमलों की घटनाएं

हरजीत सिंह की हत्या ऐसे समय हुई है जब अमृतसर में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं।

  • 30 अगस्त: ड्यूटी के दौरान ASI पवन कुमार शर्मा दोपहिया वाहन की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हुए थे। इलाज के दौरान करीब 12 दिन बाद उनकी मौत हो गई।
  • 11 सितंबर: अजनाला इलाके में ASI जसवंत सिंह पर कथित तौर पर मोटरसाइकिल सवार युवकों ने गोली चलाई थी। गोली उनके सिर को छूकर निकल गई थी और उन्हें मामूली चोट आई थी।
  • 17-18 सितंबर: भगतांवाला अनाज मंडी के पास ड्यूटी पर तैनात ASI हरजीत सिंह को गोली मार दी गई। उनकी मौत हो गई।

इन घटनाओं के बाद पंजाब में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और अपराध पर नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है।

जांच के बाद साफ होगी हत्या की वजह

हरजीत सिंह की हत्या के मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि हमले के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और इसमें कौन लोग शामिल थे। संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया है, लेकिन पुलिस ने इसे आतंकी घटना के तौर पर स्वीकार नहीं किया है।

CCTV फुटेज, घटनास्थल से मिले सबूत और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस हमलावरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, हत्या को लेकर सामने आ रहे अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।