किशाऊ बांध परियोजना के MoU पर योगी आदित्यनाथ ने जताई खुशी, बोले- सहयोग से समाधान की दिशा में बड़ा कदम
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर छह राज्यों के बीच MoU हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे जल सुरक्षा, सिंचाई, किसानों और यमुना पुनर्जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। परियोजना से कृषि क्षेत्र को सिंचाई और क्षेत्रीय पेयजल जरूरतों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का स्वागत किया है। उन्होंने इसे जल सुरक्षा और सहकारी संघवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। नई दिल्ली में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के बीच किशाऊ परियोजना को लेकर MoU पर हस्ताक्षर किए गए। यह कार्यक्रम केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुआ, जबकि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल (C.R. Paatil) भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संसाधनों के उचित उपयोग और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकल्प साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि छह राज्यों के बीच किशाऊ परियोजना को लेकर हुआ MoU ‘सहयोग से समाधान’ और सहकारी संघवाद की भावना का मजबूत उदाहरण है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही पेयजल की उपलब्धता मजबूत होगी और यमुना नदी के निर्बाध प्रवाह को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
किसानों और जल सुरक्षा को मिलेगा फायदा
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्यों का यह साझा प्रयास जल सुरक्षा और कृषि समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा। उन्होंने कहा कि इससे ‘विकसित उत्तर प्रदेश-विकसित भारत’ के निर्माण को भी नई गति मिलेगी। किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से होकर बहने वाली टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है।
232.6 मीटर ऊंचा होगा बांध
परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध के निर्माण का प्रस्ताव है। इसमें 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) की लाइव स्टोरेज क्षमता होगी। परियोजना से करीब 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है। इसके अलावा सालाना करीब 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन की भी योजना है। संग्रहित पानी से यमुना के पुनर्जीवन में मदद मिलेगी। साथ ही राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पेयजल तथा औद्योगिक जल की जरूरतों को पूरा करने में भी इसका योगदान होगा।
हिमाचल और उत्तराखंड की संयुक्त कंपनी करेगी निर्माण
किशाऊ परियोजना को किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड के जरिए लागू किया जाएगा। यह हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों का संयुक्त उपक्रम है। ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों के बीच 12 मई 1994 को यमुना के ओखला बैराज तक उपलब्ध सतही जल के बंटवारे को लेकर MoU हुआ था। इस समझौते में यमुना बेसिन में भंडारण परियोजनाएं विकसित करने की जरूरत को भी मान्यता दी गई थी।
जून में बनी थी परियोजना पर सहमति
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर यह समझौता जून में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के करीब तीन महीने बाद हुआ है। 16 जून को केंद्रीय गृह मंत्रालय में अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित इस परियोजना और यमुना के पुनर्जीवन को लेकर सहमति बनी थी। अब छह राज्यों के बीच MoU पर हस्ताक्षर होने से परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण गति मिली है।