रायबरेली, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को रायबरेली में राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडेय द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने समाज में धर्म की भूमिका और देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान शिव के प्रति साझा आस्था पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने धर्म को समाज की “जीवन शक्ति” बताया। उन्होंने कहा, “हमने धर्म को केवल पूजा के एक माध्यम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे समाज की जीवन शक्ति माना है।” योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश को अतीत में राजनीतिक कमजोरियों के कारण विदेशी आक्रमणकारियों की चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
तुलसीदास ने रामकथा के जरिए समाज को जोड़ा
मुख्यमंत्री ने मध्यकालीन दौर का उल्लेख करते हुए कवि-संत तुलसीदास (Tulsidas) के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय जब धर्म पर संकट था, तब तुलसीदास ने रामकथा के माध्यम से समाज को एकजुट करने का काम किया। योगी ने कहा कि तुलसीदास ने रामकथा को माध्यम बनाकर समाज में एकता स्थापित करने का प्रयास किया और लोगों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
#WATCH | Raebareli: Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath says, "Customs, diet, and lifestyles may differ; yet, the devotion to Shiva found among the citizens of Tamil Nadu is the very same devotion shared by the faithful in Uttar Pradesh and Uttarakhand, by the followers of Sanatan… https://t.co/UiGpbgnkGN pic.twitter.com/8450Q8bgRN
— ANI (@ANI) September 13, 2026
अलग-अलग क्षेत्रों में शिव भक्ति की एकरूपता
मुख्यमंत्री ने भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के रीति-रिवाज, खान-पान और जीवनशैली अलग हो सकती है, लेकिन भगवान शिव के प्रति आस्था में समानता दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के नागरिकों में भगवान शिव के प्रति जो भक्ति है, वही आस्था उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के श्रद्धालुओं में भी दिखाई देती है। उन्होंने पूर्वोत्तर, महाराष्ट्र और गुजरात के सनातन धर्मावलंबियों के बीच भी शिव भक्ति की समानता का उल्लेख किया। योगी आदित्यनाथ ने इस साझा आध्यात्मिक जुड़ाव को भारत की विविधता में एकता और सांस्कृतिक परंपराओं की निरंतरता से जोड़कर प्रस्तुत किया।
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