कुवैत के हवाई क्षेत्र में दिखे दुश्मन ड्रोन, रक्षा मंत्रालय अलर्ट
कुवैत सिटी, कुवैत: कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने रविवार तड़के देश के संप्रभु हवाई क्षेत्र में "कई दुश्मन ड्रोन" देखे जाने की पुष्टि की है। मंत्रालय ने कहा कि इन ड्रोन से तय सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत निपटा गया। 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच लागू हुए युद्धविराम के बाद यह पहला ऐसा मामला सामने आया है।
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअज़ीज़ अल-ओतैबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में ड्रोन की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए कहा कि सशस्त्र बल देश की सुरक्षा और नागरिकों व निवासियों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
ब्रिटिश सेना ने भी दी जानकारी
इन ड्रोन की पहचान ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में समुद्री तनाव तेजी से बढ़ रहा है। ब्रिटिश सेना ने भी रविवार को जानकारी दी कि कतर तट के पास एक जहाज पर "अज्ञात प्रोजेक्टाइल" से हमला किया गया, जिससे उसमें आग लग गई।
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) सेंटर के मुताबिक, इस हमले के बाद मालवाहक जहाज में छोटी आग लगी थी, जिसे बाद में बुझा दिया गया। घटना कतर की राजधानी दोहा से लगभग 23 नॉटिकल मील (43 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में हुई। इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
पिछले एक सप्ताह में क्षेत्र में क्षेत्र में तनाव बढ़ा
पिछले एक सप्ताह में क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ा है। शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। वॉशिंगटन का दावा था कि ये जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने की कोशिश कर रहे थे।
इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नेवी ने चेतावनी दी कि उसके व्यापारिक जहाजों या टैंकरों में किसी भी तरह की दखलअंदाजी का जवाब दुश्मन जहाजों और अमेरिकी ठिकानों पर "भारी हमले" से दिया जाएगा।
अमरीका "पूर्ण पैमाने पर बमबारी" शुरू कर सकता है
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान परमाणु कार्यक्रम खत्म करने और रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने को लेकर समझौता नहीं करता, तो अमेरिका "पूर्ण पैमाने पर बमबारी" फिर शुरू कर सकता है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद से ईरान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य पर काफी हद तक रोक लगा रखी है। इससे ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।