‘भारत ही कर सकता है यह अहम काम’, फिलिस्तीनी राजदूत ने पीएम मोदी से लगाई उम्मीद

फिलिस्तीनी राजदूत ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उन राजनीतिक ताकतों की आलोचना भी की जो इस समझौते को किसी पक्ष की हार या रणनीतिक नुकसान के रूप में देख रही हैं।

By  Preeti Kamal June 19th 2026 03:51 PM

नई दिल्ली: अमरीका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) के बाद पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शवेश (Abdullah M. Abu Shawesh) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की अपील की है।

मीडिया को दिए एक विशेष साक्षात्कार में फिलिस्तीनी राजदूत ने कहा कि शांति समझौते को किसी की हार या जीत के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा, “जब शांति होती है तो कोई हारता नहीं है। शांति में सभी की जीत होती है। केवल वे कट्टरपंथी ताकतें इससे खुश नहीं होतीं जो संघर्ष और युद्ध को ही अपना लाभ मानती हैं।”

‘भारत ही निभा सकता है यह महत्वपूर्ण भूमिका’

राजदूत अबू शवेश ने भारत की वैश्विक स्थिति और लोकतांत्रिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा, “अगर भारत यह परिष्कृत और महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा सकता, तो फिर कौन निभा सकता है? 1.4 अरब लोगों वाला भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों में से एक है और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।” उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पश्चिम एशिया में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

‘शांति सभी के हित में’

फिलिस्तीनी राजदूत ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उन राजनीतिक ताकतों की आलोचना भी की जो इस समझौते को किसी पक्ष की हार या रणनीतिक नुकसान के रूप में देख रही हैं। उनका कहना था कि शांति और स्थिरता पूरे क्षेत्र के लोगों के हित में है और इसे राजनीतिक लाभ-हानि के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

गाजा में जारी है हिंसा

हालांकि अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद गाजा पट्टी में हिंसा थमती नजर नहीं आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी गाजा के खान यूनिस इलाके में एक तंबू के पास हुए इजरायली हवाई हमले में कम से कम एक व्यक्ति घायल हो गया। इसके अलावा खान यूनिस, दैर अल-बलह और बुरेज शरणार्थी शिविर के आसपास भी गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। हालांकि कुछ घटनाओं में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

भारत की भूमिका पर बढ़ी नजरें

अमरीका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद पश्चिम एशिया में नए कूटनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में फिलिस्तीन द्वारा भारत से मध्यस्थता की अपील को क्षेत्रीय शांति प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के दोनों पक्षों के साथ संतुलित संबंध और उसकी बढ़ती वैश्विक साख उसे भविष्य की किसी भी शांति पहल में अहम भूमिका निभाने का अवसर दे सकती है।

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