स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू, इजरायल-हिजबुल्लाह तनाव पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि अंतिम समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर अपने स्तर पर टोल लगाने जैसे कदम उठा सकता है।
जिनेवा, स्विट्जरलैंड: पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में शुरू हुई अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण वार्ता के पहले ही दिन इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष सबसे प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है। वार्ता में शामिल एक राजनयिक के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस विषय पर चर्चा के लिए एक विशेष आपातकालीन सत्र शामिल किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच होने वाली पहली औपचारिक बैठक में लेबनान आधारित संगठन हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष पर चर्चा की जाएगी। यह घटनाक्रम अमेरिकी रणनीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इस मुद्दे को पहले सीधे तौर पर वार्ता का हिस्सा नहीं बनाया गया था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर मतभेद
इस बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं। ईरान का दावा है कि इजरायल द्वारा कथित युद्धविराम उल्लंघनों और लेबनान पर हमलों के जवाब में उसने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। दूसरी ओर, अमेरिका ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ईरान का ऐसा कोई नियंत्रण नहीं है।
तेल व्यापार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि अंतिम समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर अपने स्तर पर टोल लगाने जैसे कदम उठा सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वार्ता के लिए रवाना
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शनिवार को स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो गए, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही वहां पहुंच चुका है। स्विस विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन की पुष्टि की।
पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में है
इन वार्ताओं में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, इजरायल, हिजबुल्लाह और लेबनान की सरकार सीधे तौर पर इन वार्ताओं का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को लेकर इन संगठनों से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।
'शहीदों और नागरिकों की अपेक्षाएं करेंगी मार्गदर्शन'
वार्ता शुरू होने से पहले ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने मिनाब स्कूल घटना के पीड़ितों को याद करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानी ईरान के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के दौरान देश के हितों की रक्षा के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि ईरान के शहीदों और नागरिकों की अपेक्षाएं उनके हर कदम का मार्गदर्शन करेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्विट्जरलैंड में चल रही यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों में सुधार हो सकता है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।