नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-UG 2026 में दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि वैध यूनीक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड में दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत को PwBD श्रेणी के तहत आरक्षण और लाभ तय करने में प्राथमिकता दी जाएगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेडिकल असेसमेंट बोर्ड किसी उम्मीदवार के वैध UDID कार्ड में दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत को अपनी ओर से कम या दोबारा निर्धारित नहीं कर सकता। हालांकि, बोर्ड उम्मीदवार की एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए कार्यात्मक क्षमता का स्वतंत्र रूप से आकलन कर सकता है।

यह फैसला NEET-UG 2026 की पुन: परीक्षा में शामिल दो उम्मीदवारों की याचिकाओं पर आया। पहली परीक्षा 3 मई को हुई थी, जिसके पेपर लीक और परीक्षा सामग्री के कथित प्रसार से जुड़े आरोपों के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 21 जून को पुन: परीक्षा आयोजित की। पहली याचिका शिवम कुमार ने दाखिल की थी। 18 वर्षीय शिवम स्थायी दृष्टिबाधित दिव्यांगता से प्रभावित हैं। उनके सरकारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र और UDID कार्ड में 60 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता दर्ज थी। NEET-UG 2026 के प्रवेश पत्र में उनकी दिव्यांगता को दृष्टिहीनता के रूप में दर्ज किया गया था और उन्हें अतिरिक्त समय भी दिया गया था। 21 जून की परीक्षा में शिवम ने 720 में से 398 अंक हासिल किए और उनकी PwBD रैंक 409 रही।

मेडिकल बोर्ड ने 60 से घटाकर 30 प्रतिशत किया

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के मेडिकल असेसमेंट बोर्ड ने शिवम की दिव्यांगता का आकलन 30 प्रतिशत किया, जबकि बोर्ड के सामने उनके UDID कार्ड में 60 प्रतिशत दिव्यांगता दर्ज थी। बोर्ड ने यह भी माना कि शिवम एमबीबीएस की पढ़ाई करने में सक्षम हैं और उनकी स्थिति मरीजों के लिए खतरा नहीं बनेगी। बाद में अपीलीय मेडिकल PwBD असेसमेंट बोर्ड ने भी 30 प्रतिशत दिव्यांगता के आकलन को बरकरार रखा। इसके बाद उसी दिन शिवम की उम्मीदवारी PwBD श्रेणी से सामान्य श्रेणी में स्थानांतरित कर दी गई। परिणामस्वरूप वह PwBD श्रेणी में काउंसलिंग के पहले चरण में शामिल नहीं हो सके।

दूसरी याचिकाकर्ता की दिव्यांगता 61 से घटकर 16 प्रतिशत हुई

दूसरी याचिकाकर्ता आशिया के दिव्यांगता प्रमाणपत्र और UDID कार्ड में 61 प्रतिशत स्थायी लोकोमोटर दिव्यांगता दर्ज थी। हालांकि, प्राथमिक दिव्यांगता आकलन मेडिकल बोर्ड ने उनकी दिव्यांगता को दोबारा मापते हुए 16 प्रतिशत कर दिया। अपीलीय बोर्ड ने भी 16 प्रतिशत के आकलन को बरकरार रखा। इसके चलते आशिया PwBD आरक्षण के लिए अयोग्य हो गईं।

हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की सीमा स्पष्ट की

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि दिव्यांगता के अस्तित्व, प्रकृति और प्रतिशत को प्रमाणित करने के लिए UDID कार्ड प्राथमिक दस्तावेज है। मेडिकल असेसमेंट बोर्ड की भूमिका उम्मीदवार की एमबीबीएस पाठ्यक्रम करने की कार्यात्मक क्षमता का आकलन करने तक सीमित है, न कि वैध UDID कार्ड में दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत को दोबारा तय करने की। न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह ने 2026 के दिशा-निर्देशों की समीक्षा के बाद कहा कि मेडिकल असेसमेंट बोर्ड उम्मीदवार की कार्यात्मक क्षमता का स्वतंत्र मूल्यांकन कर सकता है, लेकिन दिशा-निर्देश उसे वैध UDID कार्ड में दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत पर दोबारा विचार करने का अधिकार नहीं देते।

UDID कार्ड को प्राथमिक दस्तावेज माना

अदालत ने कहा कि PwBD श्रेणी में आरक्षण की पात्रता दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत निर्धारित बेंचमार्क दिव्यांगता के आधार पर तय होती है। इस उद्देश्य के लिए वैधानिक व्यवस्था के तहत जारी UDID कार्ड प्राथमिक दस्तावेज है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी प्राधिकरण को UDID कार्ड में दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत पर आपत्ति है, तो उसे सक्षम प्रमाणन प्राधिकरण के फैसले को निर्धारित वैधानिक अपीलीय प्रक्रिया के तहत चुनौती देनी होगी। एमबीबीएस में प्रवेश के समय मेडिकल असेसमेंट बोर्ड अपने स्तर पर दिव्यांगता प्रतिशत कम नहीं कर सकता।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

अदालत ने ओम राठौड़ बनाम डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया। हाईकोर्ट ने कहा कि दिव्यांगता आकलन बोर्डों को केवल दिव्यांगता का प्रतिशत तय करने के बजाय उम्मीदवार की कार्यात्मक क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।

तीसरे चरण की काउंसलिंग में शामिल होंगे दोनों उम्मीदवार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों उम्मीदवारों के दिव्यांगता प्रतिशत को कम करने वाले मेडिकल आकलन और पात्रता प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों उम्मीदवारों को उनके-अपने UDID कार्ड में दर्ज दिव्यांगता के आधार पर PwBD श्रेणी में NEET-UG काउंसलिंग के तीसरे चरण में शामिल होने की अनुमति दी जाए। यदि मॉप-अप राउंड आयोजित होता है, तो उसमें भी दोनों उम्मीदवारों को PwBD श्रेणी के तहत भाग लेने दिया जाएगा।