मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट में हुक्का और तंबाकू से जुड़े उत्पादों पर महाराष्ट्र सरकार के रुख को लेकर एक नई याचिका दायर की गई है। इस मामले ने राज्य में तंबाकू से जुड़े सामानों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नई याचिका में उस पुराने मामले का हवाला दिया गया है, जिसमें सरकार ने जब्त किए गए हुक्का उत्पादों को नष्ट करने के बजाय पुलिस सुरक्षा में राज्य के बाहर ले जाने पर आपत्ति नहीं जताई थी। अब इस रुख को उदाहरण के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक मामले में लिया गया कानूनी स्टैंड अन्य मामलों में भी लागू हो सकता है।
जानिए आखिर क्या है पूरा मामला ?
मीडिया में आई खबर के अनुसार, यह विवाद दिसंबर 2025 से जुड़ा है, जब “हर्बल हुक्का” उत्पादों में अनियमितताओं की सूचना पर कार्रवाई की गई थी। भिवंडी और पुणे में छापेमारी के दौरान करीब 10 करोड़ रुपये के सामान जब्त किए गए थे और पुणे की एक यूनिट को सील कर दिया गया था। जांच के लिए भेजे गए सैंपल में गुड़ (मोलासेस), सुक्रोज, ग्लिसरीन, सुगंधित सुपारी और निकोटीन जैसे तत्व पाए गए। इसके आधार पर संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की गई और कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया गया।
यह कार्रवाई खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा की गई थी, जिसका नेतृत्व आयुक्त श्रीधर दुबे-पाटिल कर रहे थे। आरोपियों ने बाद में जब्त सामान की रिहाई, जमानत और केस रद्द करने की मांग की, लेकिन पुणे और भिवंडी की निचली अदालतों ने राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां राज्य सरकार ने याचिका का विरोध किया। हाईकोर्ट ने न तो केस रद्द किया और न ही जमानत दी।
हालांकि, बाद में पुनर्विचार याचिका के दौरान मामला नया मोड़ लेता है। कोर्ट ने अधिकारियों से नया हलफनामा मांगा, लेकिन FDA की ओर से नया रुख आने के बजाय महाराष्ट्र मेडिकल एजुकेशन और ड्रग्स विभाग के सचिव दीरज कुमार की ओर से एक पत्र पेश किया गया। इसमें कहा गया कि जब्त सामान को नष्ट करने के बजाय पुलिस सुरक्षा में अन्य राज्यों में भेजने पर विभाग को कोई आपत्ति नहीं है। इसके आधार पर कोर्ट ने बाद में सामान को राज्य के बाहर ले जाने की अनुमति दे दी। अब इसी आदेश को आधार बनाकर नई याचिका दायर की गई है।
नई याचिका ने सरकार के रुख पर खड़े किए सवाल
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है, जहां एनसीपी विधायक हीरामन खोसकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि अभी तक किसी नीति में बदलाव की घोषणा नहीं हुई है और न ही अदालत ने महाराष्ट्र में प्रतिबंधित उत्पादों के उत्पादन की अनुमति दी है, लेकिन इस नई याचिका ने सरकार के रुख को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।