नई दिल्ली, भारत: साकेत कोर्ट ने शनिवार को अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और तारबिया एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक एवं प्रमुख शेयरधारक जवाद अहमद सिद्दीकी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजने की मंजूरी दे दी। उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) मामले में 24 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।
आरोप है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्रों को संस्थानों में दाखिला दिलाने के नाम पर कथित रूप से 493.24 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) अर्जित की। जांच एजेंसी ने दावा किया कि आरोपी ने हरियाणा सरकार से Essentiality Certificate और National Medical Commission से अनुमति हासिल करने के लिए कई नियामक संस्थाओं को गुमराह किया।
#BREAKING: Saket Court has sent Al-Falah University Chairman Jawad Ahmad Siddiqui to three days of police custody after his arrest by the Delhi Police Special Cell. He was earlier in judicial custody in a money laundering case pic.twitter.com/lXqgzITuaL
— IANS (@ians_india) May 9, 2026
नियमित जमानत याचिका खारिज हुई थी
इससे पहले 2 मई को अदालत ने जवाद अहमद सिद्दीकी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नियमित जमानत की मांग की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) उनके खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुका है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशशीतल चौधरी प्रधान ने आरोपी और ED की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी।
विदेशों में व्यवसाय, चल-अचल संपत्तियों में निवेश का आरोप
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “यह स्पष्ट है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी/ट्रस्ट/कॉलेज से उत्पन्न अवैध धनराशि संबंधित कंपनियों—आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी, कारकुन कंस्ट्रक्शंस एंड डेवलपर्स और दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए भेजी गई। ये कंपनियां उनकी पत्नी, बच्चों और भरोसेमंद कर्मचारियों के नाम पर थीं, लेकिन नियंत्रण खुद आरोपी के पास था। इस धन को विदेशों में व्यवसाय और चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।”
#WATCH | Saket Court has approved a 3-day police custody for Al-Falah University Chairman, and Director and major shareholder of Tarbia Education Foundation, Jawad Ahmad Siddiqui. He was arrested on March 24 in connection with an ongoing investigation under the provisions of… pic.twitter.com/HDlc3oq8qB
— ANI (@ANI) May 9, 2026
भरोसेमंद पद का दुरुपयोग किया- कोर्ट
कोर्ट ने आगे कहा कि मैनेजिंग ट्रस्टी और चांसलर के रूप में आरोपी ने अपने भरोसेमंद पद का दुरुपयोग किया और शैक्षणिक एवं चैरिटेबल संस्थानों का इस्तेमाल निजी, पारिवारिक और व्यावसायिक लाभ के लिए किया, जो कानूनी दायित्वों का उल्लंघन है।
ED ने अदालत को बताया कि NAAC मान्यता और UGC की धारा 12(B) के तहत फर्जी मान्यता दिखाकर अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज समेत सभी संस्थानों को प्राप्त शैक्षणिक फीस से कुल 493.24 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।