नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में जारी गतिरोध खत्म होने की उम्मीद है। सरकार अब संसद के मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसी क्रम में लोकसभा में सोमवार को Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश किए जाने की संभावना है।

यह विधेयक प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रावधानों का प्रस्ताव करता है। विधेयक को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह पेश करेंगे। जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ मिलकर NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर Cockroach Janata Party (CJP) के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत भी की थी।

जांच और सुनवाई के लिए समय-सीमा तय करने का प्रावधान

सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले इस प्रस्तावित कानून में परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई के लिए समय-सीमा तय करने का प्रावधान है। इसके तहत राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन विशेष रूप से परीक्षा संबंधी अपराधों की सुनवाई के लिए Special Fast-Track Courts नामित कर सकेंगे।

घोटालों की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, इन अदालतों में सुनवाई रोजाना आधार पर होगी और आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, कानून के तहत दर्ज मामलों की जांच को दो महीने के भीतर पूरा करने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार को बड़े स्तर पर या कई राज्यों से जुड़े परीक्षा घोटालों की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार दिया जा सकता है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश परीक्षा से जुड़े अपराधों की पैरवी के लिए विशेष कानूनी सलाहकार भी नियुक्त कर सकेंगे।

सरकार का उद्देश्य पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना है

विधेयक में संगठित पेपर लीक में शामिल लोगों, कोचिंग संस्थानों और सेवा प्रदाताओं के खिलाफ अधिक कड़ी सजा और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों पर तेजी से कार्रवाई करना और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना है।

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था, लेकिन NEET-UG विवाद और छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के कारण पहले सप्ताह में सदन का कामकाज काफी हद तक प्रभावित रहा। विपक्षी दल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों पर चर्चा की मांग कर रहे थे।

सरकार के एजेंडे में कई विधेयक भी शामिल

मानसून सत्र के पहले सप्ताह में दो विधेयक पेश किए गए थे। इनमें लोकसभा में Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 और राज्यसभा में Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 शामिल हैं।

सरकार के एजेंडे में Income-tax (Amendment) Bill, 2026, Micro, Small and Medium Enterprises Development (Amendment) Bill, 2026, Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 और Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 जैसे अन्य विधेयक भी शामिल हैं।

संसद में सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद

वहीं, NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर Cockroach Janata Party (CJP) के नेतृत्व में चला 37 दिनों का प्रदर्शन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद संसद में सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और 13 अगस्त तक चलने की उम्मीद है।