नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसमें दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
ममता गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनाव को लेकर चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
Senior Advocate Kapil Sibal mentions a plea filed by former West Bengal Chief Minister and TMC leader Mamata Banerjee in the Supreme Court challenging the Election Commission of India’s (ECI) decision to stop her faction from using the original All India Trinamool Congress (TMC)…
— ANI (@ANI) September 21, 2026
EC ने दोनों गुटों को दिए अलग नाम और चिन्ह
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर के अंतरिम आदेश में दोनों गुटों को मूल पार्टी नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग के मुताबिक, दोनों पक्ष पार्टी के नाम और संगठनात्मक नियंत्रण पर दावा कर रहे हैं और तत्काल उपलब्ध समय में अंतिम रूप से यह तय करना संभव नहीं था कि किस गुट को मूल पार्टी के रूप में मान्यता दी जाए।
इसके बाद ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिन्ह दिया गया। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह आवंटित किया गया। ये व्यवस्थाएं आगामी उपचुनावों के लिए की गई हैं।
ममता गुट ने EC के आदेश पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी की याचिका में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया है कि आयोग ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और संबंधित परिस्थितियों का पर्याप्त आकलन नहीं किया। याचिका में आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश पर अदालत क्या रुख अपनाती है। फिलहाल आयोग का आदेश प्रभावी है और दोनों गुट अपने-अपने आवंटित नाम और चुनाव चिन्ह के साथ उपचुनाव प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं।
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